नई दिल्ली, नीलू रंजन। चीन से लाकर सेना और आइटीबीपी के कैंप में रखे गए 645 भारतीय और सात मालदीव के नागरिकों को अगले 20 फरवरी को घर जाने की अनुमति दी जा सकती है। 15 फरवरी और 18 फरवरी को इन सभी लोगों का कोरोना वायरस का अंतिम परीक्षण किया जाएगा और टेस्ट निगेटिव आने की स्थिति में दो दिन बाद उन्हें घर जाने की इजाजत मिल सकती है। कोरोना वायरस के निपटने की तैयारियों की निगरानी के लिए मंत्रिमंडलीय समूह की बैठक में स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

दरअसल कोरोना वायरस से प्रभावित चीन के वुहान से एक और दो फरवरी को 645 भारतीयों को वापस लाकर मानेसर स्थित सेना और छावला स्थित आइटीबीपी के विशेष कैंपों में रखा गया था। माना जा रहा था कि इन लोगों को 14 दिनों तक अलग-थलग रखकर उनकी जांच की जानी थी। 14-15 फरवरी को इनका 14 दिन पूरा हो जाएगा। बीच में दोनों कैंपों में कुछ लोगों को जुकाम और बुखार की शिकायत के बाद सफदरजंग और सेना के रेफरल हास्पीटल में विशेष निगरानी के लिए भी भेजा गया था। लेकिन उनके कोरोना वायरस के लिए अभी तक हुए सभी टेस्ट निगेटिव पाए गए हैं।

14 दिनों में कोरोना वायरस कमजोर हो जाता है और उसके दूसरे लोगों तक फैलने की क्षमता खत्म हो जाती है। ऐसे में यहां रखे गए लोगों को 15-16 फरवरी को घर भेजा जा सकता था। मंत्रिमंडलीय समूह की बैठक में मौजूद में एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस को लेकर सरकार अतिरिक्त सावधानी बरत रही है। यही कारण है कि 15 और 18 फरवरी को होने वाले टेस्ट के दो दिन बाद उन्हें वहां से जाने की इजाजत देने पर विचार किया जा रहा है।

वहीं मंत्रिमंडलीय समूह की बैठक के बाद स्वास्थ्य हर्षवर्धन ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकारों के साथ सभी मंत्रालय पूरे सामंजस्य के साथ कोरोना से निपटने की तैयारियों में जुटे हैं। सभी चीनी नागरिकों के वीजा निलंबित करने और एडवाइजरी जारी करने के साथ-साथ लगभग चीन, हांगकांग, सिंगापुर, थाइलैंड, दक्षिण कोरिया और जापान से आने वाले ढाई लाख से अधिक लोगों की एयरपोर्ट पर स्कीनिंग की गई है। आशंका के दायरे में आने वाले 15,991 लोगों पर 28 दिनों तक विशेष निगरानी रखी गई, जिनमें से अभी तक 3058 लोग 28 दिनों की निगरानी की सीमा पूरी कर चुके हैं।

उनके अनुसार अभी तक केवल तीन लोग केरल में कोरोना वायरस से पीडि़त मिले हैं, जिनका इलाज किया जा रहा है। नेपाल के साथ खुली सीमा को देखते हुए वहां से सटे गांवों में ग्रामसभा के माध्यम से जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है और हर दिन की रिपोर्ट मंगाई जा रही है।

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