गुरुदीप त्रिपाठी, प्रयागराज। कोरोना वायरस के खिलाफ चल रही जंग के बीच इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय (इविवि) में रसायन विज्ञान विभाग के हाथ बड़ी कामयाबी लगी है। रसायन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर रमेंद्र कुमार सिंह के निर्देशन में आठ ऐसे रासायनिक यौगिकों को खोज निकाला गया है जो वायरस के संक्रमण से लड़ने में कारगर साबित होंगे। प्रयोगशाला में कंप्यूटरीकृत परीक्षण के बाद जैविक परीक्षण के लिए इसे बेल्जियम के रेगा इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल रिसर्च भेज गया है। वहां से सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद इसके पेटेंट के लिए भारत सरकार द्वारा प्राधिकृत संस्था में आवेदन किया जाएगा। यह अहम शोध फ्रांस के प्रतिष्ठित जर्नल आफ बायोमालीक्यूलर स्ट्रक्चर एंड डायनमिक्स के जुलाई 2021 के अंक में प्रकाशित हुआ है।

कंप्यूटर पर शुरू हुआ अध्ययन

प्रोफेसर रमेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि संक्रमण दूर करने के लिए दवा की जरूरत महसूस हुई। इस पर उन्होंने शोध शुरू किया। इसके लिए 50 रासायनिक यौगिकों पर कंप्यूटर आधारित अध्ययन हुआ। इसके अलावा शरीर में वायरस के प्रवेश करने और उसके हमला करने के तरीकों को समझा गया। फिर वायरस के प्रोटीन को केंद्रबिंदु मानकर कंप्यूटर पर 50 तरह के यौगिकों और वायरस के प्रोटीन के बीच मिलान कराया गया। इसमें चौंकाने वाले परिणाम सामने आए।

कुल 50 में आठ यौगिकों की पहचान कोरोना वायरस के संक्रमण को मात देने वाले यौगिकों के रूप में हुई, जो कोरोना संक्रमण खत्म करने की दवा बनाने में कारगर हो सकते हैं। कोरोना वायरस के खिलाफ इन यौगिक की कार्यक्षमता काफी अधिक मिली। शोध के दौरान यह भी पाया गया कि यह यौगिक मानव शरीर पर किसी तरह का प्रतिकूल प्रभाव नहीं छोड़ेंगे।

लैब में भी वैज्ञानिकों को सफलता

प्रोफेसर रमेंद्र कुमार सिंह के अनुसार कंप्यूटर आधारित अध्ययन में कामयाबी मिलने के बाद विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला में इन यौगिकों को बनाया गया। यहां यौगिकों से तैयार संभावित ड्रग और वायरस के प्रोटीन का मिलान कराया तो यौगिक असरकारक पाए गए। सकारात्मक परिणाम आने पर इसकी रिपोर्ट तैयार कर बेल्जियम भेज दी गई।

कोशिका की परत पर होगा परीक्षण

इविवि में दो चरणों में कामयाबी मिलने के बाद वैज्ञानिकों ने जैविक परीक्षण के लिए इसे बेल्जियम के रेगा इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल रिसर्च भेज दिया है। वहां प्रयोगशाला में पहले चरण में कोशिका की परत पर और फिर टिशू पेपर पर परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से चूहे और बंदर पर परीक्षण होगा। नतीजे सकारात्मक रहने पर अनुमति लेकर मानव पर परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद इसे बाजार में उतारने की कवायद शुरू की जाएगी।

टीम में यह हैं शामिल

इविवि रसायन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर रमेंद्र कुमार सिंह के निर्देशन में किए गए इस अहम शोध में बायोइनफार्मेटिक्स विभाग ने भी भूमिका निभाई है। टीम में रसायन विज्ञान विभाग से डाक्टर विशाल सिंह, हिमानी चौरसिया, ऋचा मिश्रा, डाक्टर रितिका श्रीवास्तव, डाक्टर फरहा नाज और डाक्टर अनुराध सिंह शामिल हैं। बायोइनफार्मेटिक्स विभाग से डाक्टर अनूप सोम और प्रियंका कुमार ने प्रतिभाग किया।

Edited By: Arun Kumar Singh