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तुर्किए में 9 नवंबर से COP-31 में विकसित देशों पर फंड का दबाव बनाएगा भारत, बिजली की हिस्सेदारी 35% करने पर चर्चा

Published: Tue, 03 Nov 2026 11:43 PM (IST)

तुर्किए में होने वाले COP-31 सम्मेलन में 2035 तक कुल ऊर्जा खपत में बिजली की हिस्सेदारी 35% तक बढ़ाने पर चर्चा होगी, जो वर्तमान में 20% है।

तुर्किए में 9 नवंबर से COP-31 सम्मेलन।

तुर्किए में 9 नवंबर से COP-31 सम्मेलन।

HighLights

  1. COP-31 में 2035 तक बिजली की हिस्सेदारी 35% करने का लक्ष्य।

  2. भारत पेरिस समझौते, ग्लोबल साउथ और हिमालय संरक्षण पर जोर देगा।

  3. नवीकरणीय ऊर्जा और खराब भूमि संरक्षण में भारत की उपलब्धियां प्रस्तुत होंगी।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। जलवायु परिर्वतन की बढ़ती चुनौतियों के बीच वैश्विक स्तर पर फिर से जीवाश्म ईंधन पर से निर्भरता घटाने को लेकर चर्चा तेज हुई है। इस कड़ी में नौ नवंबर से तुर्किए में शुरू हो रही कांफ्रेंस आफ पार्टीज ( काप-31) के एजेंडे में कुल ऊर्जा खपत में बिजली की हिस्सेदारी को 35 प्रतिशत तक बढ़ाने के मुद्दे को प्रमुखता से शामिल किया है।

जिसे 2035 तक हासिल करने का लक्ष्य भी रखा गया है। हालांकि मौजूदा समय में दुनिया में कुछ ऊर्जा खपत में बिजली की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत ही है। वैश्विक स्तर पर यह पहल तब की गई है, जब रिन्यूएबल एनर्जी के जरिए बिजली का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। भारत में मौजूदा समय में इसकी क्षमता तीन सौ गीगावाट से अधिक हो चुकी है।

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने काप-31 से जुड़ी जानकारी देते हुए बताया कि काप के दौरान इसके अतिरिक्त एजेंडे में जिन विषयों को शामिल किया है, उनमें कचरा प्रबंधन के साथ ही शहरों को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाने जैसे मुद्दे शामिल किए गए है।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि भारत इस दौरान पेरिस समझौते के अमल के मुद्दे को प्रमुखता से दुनिया के सामने रखेगा। साथ ही विकसित देशों पर इस बात का दबाव बनाएगा, कि वह अपने उन वादों को पूरा करें, जिसके तहत विकासशील देशों को वित्तीय व तकनीकी सहायता मुहैया करानी थी। यह सम्मेलन 20 नवंबर तक चलेगा।

केंद्रीय मंत्री यादव ने एक अन्य सवाल के जवाब में बताया कि पहले की तरह भारत इस बार भी ग्लोबल साउथ की आवाज को प्रमुखता से उठाएगा। इसके साथ ही हिमालयन क्षेत्र के संरक्षण के मुद्दे को भी वह प्रमुखता से रखेगा।

साथ ही आपदा से बुरी तरह से प्रभावित नेपाल को वैश्विक स्तर पर और अधिक मदद दिलाने की बात भी रखेगा। सम्मेलन के दौरान भारत अपनी रिन्यूएबल एनर्जी सहित खराब भूमियों के संरक्षण से जुडी उन उपलब्धियों को भी रखेगा, जिसे उसने तय समय से पहले ही हासिल किया है।

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