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ट्रांसजेंडर संशोधन बिल 2026 पर विवाद, समुदाय ने किया विरोध; कहा- 'घटाए जा रहे अधिकार'

Published: Fri, 20 Mar 2026 04:28 PM (IST)

केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) संशोधन विधेयक 2026 को लेकर देश में बहस छिड़ ...और पढ़ें

ट्रांसजेंडर संशोधन बिल 2026 पर विवाद समुदाय ने किया विरोध (फाइल फोटो)

ट्रांसजेंडर संशोधन बिल 2026 पर विवाद समुदाय ने किया विरोध (फाइल फोटो)

HighLights

  1. ट्रांसजेंडर बिल 2026 पर देशभर में विरोध प्रदर्शन।

  2. पहचान के लिए मेडिकल जांच, डीएम की मंजूरी अनिवार्य।

  3. समुदाय का आरोप, अधिकार कमजोर किए जा रहे हैं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों को लेकर देश में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) संशोधन विधेयक 2026 को लेकर समुदाय, विशेषज्ञों और विपक्ष ने चिंता जताई है।

इस बिल के विरोध में देशभर में प्रदर्शन भी हो रहे हैं। यह विधेयक केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार ने लोकसभा में पेश किया है। इसका उद्देश्य 2019 के ट्रांसजेंडर कानून में बदलाव करना है।

लेकिन कई लोगों का मानना है कि यह नया संशोधन सुप्रीम कोर्ट के 2014 के नाल्सा फैसले के खिलाफ जाता है, जिसमें जेंडर पहचान को व्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा माना गया था। समुदाय और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह बिल पहले मिले अधिकारों को कमजोर कर सकता है, जिससे ट्रांसजेंडर लोगों की आजादी और अधिकार प्रभावित होंगे।

क्या हैं नए बदलाव?

2019 के कानून के तहत कोई भी व्यक्ति खुद अपनी जेंडर पहचान तय कर सकता था। लेकिन 2026 के नए बिल में इस अधिकार को हटा दिया गया है। अब किसी व्यक्ति को अपनी पहचान साबित करने के लिए मेडिकल जांच, स्क्रीनिंग कमेटी और जिला मजिस्ट्रेट की मंजूरी लेनी होगी। इस प्रक्रिया को लंबा और मुश्किल बताया जा रहा है।

ट्रांसजेंडर समुदाय का कहना है कि यह संशोधन उनके अधिकारों को बढ़ाने के बजाय कम करता है। उनका मानना है कि इससे उनकी पहचान पर नियंत्रण बढ़ जाएगा। एक्टिविस्ट्स का यह भी कहना है कि बिल की कुछ धाराएं ट्रांसजेंडर पहचान को गलत तरीके से दिखाती हैं। इससे उन लोगों पर भी असर पड़ सकता है जो किसी की जेंडर पहचान में मदद करते हैं।

समुदाय की चिंता

प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि यह कानून उनकी आजादी और सम्मान के खिलाफ है। उनका मानना है कि सरकार को ऐसा कानून बनाना चाहिए जो उनके अधिकारों को मजबूत करे, न कि उन्हें और सीमित करे।

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