BRICS की रसोई पर कांग्रेस की हांडी, शाकाहारी भोजन पर 'नाराज फूफा पॉलिटिक्स'
ब्रिक्स सम्मेलन में विदेशी मेहमानों को केवल शाकाहारी भोजन परोसे जाने पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है, जिसमें राहुल गांधी ...और पढ़ें
-1789313488412_m.webp)
कांग्रेस ने ब्रिक्स समिट में सिर्फ शाकाहारी भोजन परोसने पर आपत्ति जताई

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जितेंद्र शर्मा, नई दिल्ली। ब्रिक्स सम्मेलन के मंच से वैश्विक प्रगति के रोडमैप पर चर्चा कर दुनिया भर से आए मेहमान विदा हो गए। कूटनीतिक सफलता को लेकर भारत सरकार संतुष्ट है कि आतंकवाद पर चिंता जताते हुए सदस्य देशों ने सामूहिकता में पहलगाम हमले की निंदा की।
भारत की मेजबानी में कई देशों के बीच खटास खत्म होती दिखी, लेकिन इस सबके बीच विपक्ष, खास तौर पर कांग्रेस ने भारत मंडपम की रसोई से शनिवार के रात्रि भोज के 'मैन्यू से सियासी खुराक ढूंढते हुए अपनी 'हांडी' चढ़ा दी है।
राहुल ने शाकाहारी भोजन परोसने पर आपत्ति जताई
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेता से लेकर पार्टी के तमाम नेताओं को आपत्ति है कि विदेशी मेहमानों को सिर्फ शाकाहारी भोजन क्यों खिलाया? उन्हें भारत का मांसाहारी डिश क्यों नहीं खिलाया?
जाहिर तौर पर इसी बहाने संभवत: विपक्ष देशभर और खासकर हाल की पश्चिम बंगाल राजनीति को गरम रखना चाहता है। सोशल मीडिया का ट्रेंड बता रहा है कि ऐसे गंभीर आयोजन पर इस तरह के मुद्दे उठाया जाना भला किसी को कैसे पच सकता है।
इस पर 'नाराज फूफा पालिटिक्स' के चटखारे शुरू हो गए हैं। ब्रिक्स समिट के लिए दुनिया भर से आए मेहमानों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मेजबानी में गाला डिनर दिया गया।
भारत मंडपम में आयोजित इस विशेष भोज की विशेषता यह रही कि इसमें सभी खाद्य पदार्थ शुद्ध शाकाहारी ही थे। श्रीअन्न और अन्य शाकाहारी पदार्थों से बने व्यंजन का अतिथियों ने खूब लुत्फ लिया। रविवार को समिट का अंतिम दिन था।
छोले-भटूरे पर छिड़ा विवाद
पीएम ने इस तीन दिन में 15 द्वपक्षीय बातचीत की। आपसी और सामूहिक संबंध प्रगाढ़ हुए। जिसस तरह दिल्ली घोषणापत्र पर सहमति बनी उसे उपलब्धि माना जा रहा है।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा की जा रही थी। तभी राहुल गांधी की ओर एक्स पर पोस्ट छोले-भटूरे की तस्वीर पोस्ट की।
साथ ही लिखा,'यह रिकार्ड के लिए है: 80 प्रतिशत भारतीय मांसाहारी हैं। भारतीय मांसाहार स्वादिष्ट है, जैसे कि मेरी बहन के छोले-भटूरे। बात मांसाहार की और तस्वीर छोले-भटूरे की...।
यह टिप्पणी बेशक उलझी हुई हो, लेकिन संदेश साफ था कि राहुल मुद्दा क्या उठाना चाहते हैं। खैर, समझने के लिए आम लोगों को दिमाग लगाने की जरूरत नहीं पड़ी।
राहुल के पोस्ट पर खेड़ा का री-पोस्ट
राहुल की पोस्ट को ही अपनी टिप्पणी के साथ री-पोस्ट करते हुए कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने लिख दिया- 'दूसरे भारतीयों पर अपनी खान-पान की पसंद थोपने की भाजपा की आदत पहले से ही बहुत समस्या वाली रही है। अब उन्होंने दुनिया भर के बड़े मेहमानों पर भी अपनी पसंद थोपकर इसे और आगे बढ़ा दिया है।
भारत एक समृद्ध और विविधताओं वाला देश है, जहां कई तरह के बेहतरीन नान-वेज व्यंजन मिलते हैं, जिन्हें दुनिया भर के लोग पसंद करते हैं और उनका आनंद लेते हैं। तो फिर मोदी सरकार ने भारत की संस्कृति के इस हिस्से को छिपाने का फैसला क्यों किया? क्या उसे उस विविधता से शर्म आती है, जो भारत की असली पहचान है?'
इसके बाद सुप्रिया श्रीनेत, श्रीनिवास बीवी सहित तमाम नेताओं ने राहुल के समर्थन पर शाकाहारी भोजन पर सवाल उठाना शुरू कर दिया। इस पर सरकार की ओर से ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं दी गई। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने लिखा- मुझे यकीन नहीं हो रहा कि कांग्रेस ब्रिक्स देशों के नेताओं को परोसे गए खाने के मेन्यू पर भी राजनीति कर रही है।
हमारे मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी भोजन का आनंद लिया, जो स्वाद और पोषण से भरपूर है और जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराएं शामिल हैं। वहीं, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने लिखा- मोदी जी के नेतृत्व में ब्रिक्स की बढ़ती ताकत और सफलता को आज पूरी दुनिया स्वीकार कर रही है, लेकिन देश के अंदर कुछ नाराज फूफा अब भी मुंह फुलाए बैठे हैं। इसी तरह कई इंटरनेट मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रिया आई।
