नई दिल्ली, [जाब्यू]। चुनावी मौसम में ऑपरेशन ब्लूस्टार और सिख दंगों का जिन्न एक बार फिर कांग्रेस नेतृत्व वाली संप्रग सरकार की मुश्किलें बढ़ा सकता है। भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा है कि सरकार इस ऑपरेशन से जुड़े सही तथ्यों को उजागर करें। इससे पहले अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में 1984 के ऑपरेशन ब्लूस्टार के लिए ब्रिटेन सरकार की मदद का सनसनीखेज दावा सामने आया है। इंदिरा गांधी सरकार के आग्रह पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री मार्गेट थैचर के सैन्य मदद मुहैया कराने की बात कथित ब्रिटिश सरकारी दस्तावेजों में सामने आई है।

भाजपा ने पूछा कि क्या स्वर्ण मंदिर में छिपे सिख अतिवादियों के खिलाफ कार्रवाई की योजना ब्रिटेन की सलाह पर की गई या किसी अन्य देश से भी सलाह ली गई थी। राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि यह समय है जब भारत सरकार हमें इस बारे में सच बताने का फैसला करे कि असल तथ्य क्या थे। इससे भारत की जनता यह फैसला कर पाएगी कि आपरेशन ब्लू स्टार रणनीतिक गलती थी या नहीं।

वहीं, पंजाब की सत्तारूढ़ पार्टी शिरोमणि अकाली दल ने कहा कि इसने सिखों के विरुद्ध कांग्रेस के बड़े षड्यंत्र का पर्दाफाश किया है। शिअद के सचिव दलजीत सिंह चीमा ने चंडीगढ़ में एक बयान जारी कर कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए कांग्रेस राष्ट्रीय संप्रभुता से समझौता करने के हद तक गिरी है।

हालांकि, ऑपरेशन ब्लू स्टार का नेतृत्व करने वाले जनरल (रिटायर्ड) के एस बरार ने मंगलवार को कहा कि यह योजनाबद्ध था तथा इसे भारतीय सैन्य कमांडों ने अंजाम दिया। बरार ने एक टीवी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, मैं यह सुनकर आश्चर्यचकित हूं क्योंकि यह ऑपरेशन भारतीय सैन्य कमांडरों के नेतृत्व में चलाया गया। कोई सवाल ही नहीं उठता, हमारे सामने कभी कोई ब्रिटेन से नहीं आया जिसने हमें यह बताया हो कि ऑपरेशन कैसे प्लान किया जाए।

उधर, ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने वर्ष 1984 में इंदिरा गांधी की ऑपरेशन ब्लू स्टार की योजना में ब्रिटेन की तत्कालीन प्रधानमंत्री मार्गेट थचर की सरकार की मदद से जुड़े फैसले की तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। कैमरन ने अपने कैबिनेट सचिव जेरेमी हेवुड से कहा कि वे जांच करें। लेबर सांसद टॉम वाटसन और लॉर्ड इंद्रजीत सिंह ने हाल ही में गोपनीयता की सूची से हटाए गए दस्तावेजों के आधार पर इस स्पष्टीकरण की मांग की है।

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गोपनीयता कानून की मियाद खत्म गोपनीयता कानून की तीस वर्षो की मियाद खत्म होने के बाद सार्वजनिक हुए कथित सरकारी दस्तावेजों के अनुसार अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पर 1984 में हुई भारतीय सेना की कार्रवाई में ब्रिटेन की स्पेशल एयर सर्विस (एसएएस) ने मदद की थी। 'अति गोपनीय व व्यक्तिगत' शीर्षक वाले इन दस्तावेजों के मुताबिक ब्रिटिश प्रधानमंत्री मार्गेट थैचर के निर्देश पर ऐसा हुआ था। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कार्यालय से इस ऑपरेशन से चार महीने पहले 6 फरवरी 1984 को लिखे पत्र के मुताबिक भारत सरकार की ओर से स्वर्ण मंदिर से अलगाववादियों को निकालने की योजना में मदद मांगी गई है।

क्या था ऑपरेशन ब्लू स्टार

जून 1984 में स्वर्ण मंदिर से सिख अलगाववादियों को सैन्य अभियान के द्वारा बाहर निकाला गया था। इसमें सिखों के इस पवित्र स्थल को भी काफी नुकसान हुआ था। इसकी प्रतिक्रिया में सिख अंगरक्षकों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी थी। इसके बाद हुए दंगों में बड़ी संख्या में सिखों की हत्या कर दी गई थी।

ब्रिटिश सैन्य अधिकारी आया था भारत

ब्रिटिश विदेश मंत्रालय के 23 फरवरी 1984 के एक पत्र के मुताबिक स्वर्ण मंदिर से चरमपंथियों को निकालने की योजना में मदद के लिए विशेष सैन्य दस्ते के एक अधिकारी की भारत यात्रा का उल्लेख है। इन दस्तावेजों के अनुसार ब्रिटिश अधिकारी ने एक योजना भी बनाई, जिसे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मंजूरी भी दे दी। ब्रिटेन के लेबर पार्टी सांसद टॉम वाटसन और लार्ड इंद्रजीत सिंह के इन दस्तावेजों के आधार पर स्पष्टीकरण मांगने के बाद प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कैबिनेट सचिव से जांच करने और तथ्यों के पुष्टिकरण के आदेश दिए हैं।

तथ्य साझा करने का आग्रह

इस बीच सामने आए ताजा दावों के मद्देनजर भारत ने ब्रिटेन से तथ्य साझा करने का आग्रह किया है। मीडिया में आई खबरों पर प्रतिक्रिया दे रहे विदेश मंत्रलय प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि हम मामले को ब्रिटेन सरकार के साथ उठाएंगे। हम चाहेंगे कि इस संबंध में जानकारी हमसे साझा की जाए। हालांकि, ऑपरेशन ब्लूस्टार में शामिल रहे सैन्य अधिकारियों ने इन दावों को खारिज किया है। सैन्य ऑपरेशन के कमांडर रहे सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल केएस बरार ने कहा कि ब्लूस्टार में ब्रिटेन से कोई मदद नहीं ली गई। महत्वपूर्ण है कि लंदन में ही 2012 के दौरान सैन्य अधिकारी बरार पर जानलेवा हमला भी किया गया था।

छह दिन चला खूनखराबा

छह दिन तक चले भीषण खूनखराबे के बाद ही सेना को चरमपंथियों को खत्म करने में सफलता मिली। ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सिख पुस्तकालय जल गया। सरकार के मुताबिक 83 सैनिक मारे गए और 249 घायल हुए। 493 चरमपंथी या आम नागरिक मारे गए, 86 घायल हुए।

इंदिरा गांधी की हत्या

सरकार की कार्रवाई से नाराज दो सिख अंगरक्षकों ने 31 अक्तूबर को इंदिरा गांधी की हत्या कर दी। इसके बाद भड़के सिख विरोधी दंगों से कांग्रेस और सिखों की बीच की खाई और बड़ी हो गई।

पंजाब समस्या एवं भिंडरावाला का उदय

पंजाब समस्या की शुरुआत 1970 के दशक से अकाली राजनीति में खींचतान और अकालियों की पंजाब संबंधित मांगों को लेकर शुरू हुई थी। 11973 में और फिर 1978 में अकाली दल ने आनंदपुर साहिब प्रस्ताव पारित किया। इसमें सुझाया गया था कि भारत की केंद्र सरकार का केवल रक्षा, विदेश नीति, संचार और मुद्रा पर अधिकार हो जबकि अन्य विषयों पर राज्यों को पूर्ण अधिकार हों। अकाली ये भी चाहते थे कि भारत के उत्तरी क्षेत्र में उन्हें स्वायत्तता मिले।

अकाली की मांगों को भिंडरावाले ने आक्रामक अंदाज में अपनाया और केंद्र को दोषी ठहराने लगा। उसके भड़काऊ भाषणों को धीरे-धीरे समर्थन मिलने लगा। अप्रैल 1980 में उसने स्वर्ण मंदिर को अपना हेडक्वार्टर बना लिया।

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