हरिकिशन शर्मा, नई दिल्ली। तमाम बड़ी कपंनियां विदेश से आयात किए गए माल पर आइजीएसटी (इंटीग्रेटेड जीएसटी) का भुगतान तो कर रही हैं लेकिन उसका क्रेडिट लेने के लिए दावा पेश नहीं कर रहीं। इससे टैक्स अधिकारियों के कान खड़े हो गए हैं। शंका इस बात की है कि ये कंपनियां सामान को या तो बगैर बिल के बेच रही हैं या इसकी कालाबाजारी कर रही हैं।

सूत्रों के अनुसार जीएसटी के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभाल रहे आला टैक्स अधिकारियों ने एक लाख से अधिक व्यापारियों द्वारा आयात पर किए गए आइजीएसटी भुगतान के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। टैक्स अधिकारियों ने यह निष्कर्ष हाल में हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में भी एक प्रजेंटेशन के रूप में रखे।

सूत्रों के मुताबिक आयात करने वाले 73,380 जीएसटी करदाताओं ने आजीएसटी क्रेडिट का जो दावा किया है वह अपेक्षानुरूप काफी कम है। एक अनुमान के मुताबिक यह अपेक्षा से लगभग 30,000 करोड़ रुपये कम है। इसमें अधिकांश बड़ी कंपनियां हैं। टैक्स अधिकारियों को यह तथ्य गले नहीं उतर रहा है कि इन कंपनियों ने आइजीएसटी भुगतान के क्रेडिट का दावा इतना कम क्यों किया।

दरअसल अंतर-राज्यीय कारोबार या विदेश से आयात की स्थिति में आइजीएसटी का भुगतान करना होता है। व्यापारियों को इसका क्रेडिट मिलता है जिसका इस्तेमाल वे सीजीएसटी (सेंट्रल जीएसटी) या एसजीएसटी (स्टेट जीएसटी) के भुगतान के लिए कर सकते हैं। हालांकि बहुत सी कंपनियां आइजीएसटी के क्रेडिट का दावा नहीं कर रही हैं। अधिकारियों ने इस संबंध में मोबाइल फोन का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ कंपनियां विदेश से आयात पर आइजीएसटी का भुगतान कर रही हैं लेकिन इसके बाद आयातित माल को घरेलू बाजार में या तो बिना बिल के बेच रही हैं या फिर आयात का मूल्य ही कम दिखा रही हैं। साथ ही इसकी कालाबाजारी भी कर रही हैं।

टैक्स अधिकारियों ने कस्टम बंदरगाहों पर आयात किए गए माल पर चुकाए गए आइजीएसटी व सैस तथा व्यापारियों की ओर से दाखिल किए गए जीएसटी रिटर्न 'जीएसटीआर-3बी' की टेबल चार में उनके द्वारा किए गए आइजीएसटी व सैस क्रेडिट के दावे के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद किया है। इसके बाद ही ये तथ्य सामने आए हैं।

सूत्रों ने कहा कि 33,622 करदाता ऐसे भी हैं जिन्होंने 10,659 करोड़ रुपये के अतिरिक्त आइजीएसटी क्रेडिट का दावा किया है जबकि उनके कारोबार के रिकार्ड के हिसाब से उनका क्रेडिट इतना नहीं बनता। सूत्रों ने कहा कि यह शुरूआती विश्लेषण है। आने वाले दिनों इसी तरह का व्यापक विश्लेषण कर टैक्स अधिकारी धांधली करने वाली कंपनियों के खिलाफ कदम उठा सकते हैं।

By Ravindra Pratap Sing