नई दिल्ली, जेएनएन। भारत में विदेशी पटाखों और आतिशबाजी की बिक्री और संग्रह प्रतिबंधित है। यह दंडनीय अपराध भी है। इनके आयात अथवा बिक्री के लिए लाइसेंस नहीं दिया जा रहा है। बावजूद इसके, यह उत्पाद गैरकानूनी तरीके से चीन से यहां पहुंचा दिए जाते हैं, खासकर दिवाली के मौके पर। यह प्रवृत्ति देश और देशवासियों के लिए हितकर नहीं है।

सरकारी संस्थाएं इसे रोकने का उपक्रम करती हैं। इस बार भी कर रही हैं। किंतु आम नागरिक की भी जिम्मेदारी है कि वह ऐसे गैरजिम्मेदार लोगों, धंधेबाजों की सूचना स्थानीय पुलिस-प्रशासन को अवश्य दे। परंतु आम व्यक्ति जागरूकता के अभाव में ऐसा नहीं कर पाता है। दिवाली पर वह स्वयं भी जाने-अनजाने इन्हें खरीद लाता है, जबकि इन्हें खरीदना और संग्रह करना भी गैरकानूनी है।

ऐसे में आवश्यकता इस बात की है कि सरकार आम जन को भी इस बारे में भलीभांति सूचित और जागरूक करे, ताकि उन उद्देश्यों की प्राप्ति की जा सके जिनके लिए ऐसे उत्पादों को देश में प्रतिबंधित किया गया है।

चीन से यहां खपाए जाने वाले पटाखे सल्फर और क्लोरेट जैसे हानिप्रद रसायनों से बनते हैं, जो घातक प्रदूषण उत्पन्न करते हैं। इसे देखते हुए जनवरी, 1992 से भारत सरकार ने उक्त रसायनों से बने पटाखों और आतिशबाजी की बिक्री पर रोक लगाई है। विदेश व्यापार निदेशालय, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार ने भी विदेश निíमत ऐसे पटाखों-आतिशबाजी (फायरव‌र्क्स) के आयात को आइटीसी-एचएस कोड देकर प्रतिबंधित किया है।

विस्फोटक संबंधी नियमों के तहत प्रतिबंधों का किया गया प्रावधान

यही कारण है कि विदेश निर्मित पटाखों और आतिशबाजी के आयात का लाइसेंस नहीं दिया जा रहा है और ना ही बिक्री और संग्रहण का। विस्फोटक संबंधी नियमों (Explosives Rules), 2008 के तहत ऐसे विविध प्रतिबंधों का प्रविधान किया गया है।

उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय भारत सरकार स्पष्ट करता है कि ऐसे किसी भी पटाखा-आतिशबाजी उत्पाद का, जिसमें किसी भी प्रकार का 'क्लोरेट' (पोटेशियम क्लोरेट, सल्फरेट इत्यादि) रसायन मौजूद हो, इनका भारत में निर्माण, आयात, संग्रहण और बिक्री गैरकानूनी और दंडनीय अपराध है इसलिए इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी जानी चाहिए।

बनें जागरूक और जिम्मेदार..

आम भारतीय के लिए अत्यावश्यक हो जाता है कि वह ऐसे पटाखों की पहचान करें और स्थानीय पुलिस-प्रशासन को इनके विक्रेता अथवा संग्रहकर्ता की सूचना दें। यही नहीं, इस बात पर भी नजर रखें कि कार्रवाई हो। इस काम में 'दैनिक जागरण' आपके साथ है। हमें भी सूचित अवश्य करें।

आगे आए जनता..

पर्यावरण व शिक्षाविद एवं मैग्सेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक ने कहा कि हर दायित्व सरकार पर छोड़ देना ठीक नहीं है। जनता को सजग हो जाना चाहिए। चीनी उत्पादों से देश को राजस्व की क्षति होती है, जबकि चीन माल कमाता है और हमारे विरुद्ध षडयंत्र जारी रखता है। इस मुहिम में जनता को आगे आना चाहिए।

पटाखों को कहें न..

इतिहासकार विक्रमजीत सिंह रूपराय ने कहा कि बेहतर होगा कि पटाखों से परहेज करें। भारतीय उत्सव परंपरा में इनका कहीं कोई स्थान है भी कि नहीं, इस पर अध्ययन किया जा सकता है। दीपावली दीपों, प्रकाश और प्रकृति पूजन का त्योहार है, प्रदूषण क्यों फैलाएं। विशेषकर तब जब प्रदूषण और कोरोना जीवन लील रहे हों, इससे बचें और दूसरों को बचाएं।

Edited By: Dhyanendra Singh