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सरकारी कार्यक्रमों में तमिल एंथम अनिवार्य, तमिलनाडु विधानसभा में प्रस्ताव पेश; DMK-AIADMK ने किया समर्थन

Published: Mon, 10 Aug 2026 11:23 AM (IST)

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया, जिसके तहत राज्य के सभी सरकारी कार्यक्रमों ...और पढ़ें

विधानसभा में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय।

विधानसभा में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय।

डिजिटल डेस्क, चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोमवार को विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव के तहत राज्य भर में सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में राज्य गीत तमिल थाई वाजथु गाना अनिवार्य कर दिया गया है।

विधानसभा में प्रस्ताव पेश करते हुए विजय ने कहा कि उनकी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) सरकार तमिलनाडु के भाषाई और सांस्कृतिक अधिकारों से कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने विधायकों से इस कदम का समर्थन करने के लिए राजनीतिक मतभेदों को भुलाने की अपील की।

'मां की तरह पवित्र है हमारी मातृभाषा'

विजय ने भावुक भाषण में कहा, "हमारी मातृभाषा उतनी ही पवित्र है जितनी हमारी मां।" उन्होंने आगे कहा, "तमिल सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि हमारा जीवन और हमारी भावनाएं भी है। तमिल का मतलब है गर्व, तमिल का मतलब है शक्ति।" उन्होंने कहा, "जिस पल आप तमिल कहते हैं, पूरा तमिलनाडु एकजुट होकर एक साथ खड़ा हो जाता है।"

उन्होंने कहा, "तमिलनाडु में तमिल थाई वाजथु को पहला स्थान मिलना चाहिए। तमिल थाई वाजथु को पहला स्थान देना हमारा राज्य का अधिकार है।" तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने सभी पार्टियों के सदस्यों से प्रस्ताव का समर्थन करने की अपील करते हुए कहा, "तमिल थाई वाजथु को सबसे पहले गाया जाना चाहिए, इस बात को लेकर कोई राजनीतिक बहस नहीं होनी चाहिए।"

डीएमके और एआईएडीएमके ने भी किया समर्थन

इस प्रस्ताव के तहत, तमिलनाडु में शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों, सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में सबसे पहले तमिल थाई वाजथु गाया जाएगा। इस प्रस्ताव को डीएमके और एआईएडीएमके दोनों दलों के विधायकों का समर्थन मिला। सदस्यों ने सरकारी कार्यक्रमों में राज्य गीत गाना अनिवार्य करने के सरकार के कदम का समर्थन किया।

यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय की हालिया सलाह के बीच उठाया गया है, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगान से पहले वंदे मातरम् बजाने के 28 जनवरी के निर्देश का पालन करने को कहा गया था। यह कदम गृह मंत्रालय के 9 जुलाई के उस निर्देश की पृष्ठभूमि में भी उठाया गया है जिसमें सरकारी कार्यक्रमों में राज्य गीत गाने के बारे में बात कही गई थी।

प्रस्ताव में क्या कहा गया है?

प्रस्ताव में तमिल थाई वाजथु को तमिल भाषा और संस्कृति के प्रति सम्मान का प्रतीक बताया गया है और इसके अनिवार्य गायन को संविधान के तहत गारंटीकृत भाषाई और सांस्कृतिक अधिकारों से जोड़ा गया है।

प्रस्ताव में कहा गया है, "यह सदन (तमिलनाडु विधानसभा) इस बात पर जोर देता है कि तमिल थाई वाजथु तमिल भाषा और तमिल संस्कृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। भारत के संविधान द्वारा दिए गए भाषाई और सांस्कृतिक अधिकारों के तहत और तमिलनाडु की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के उद्देश्य से तमिलनाडु विधानसभा सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित करती है कि तमिलनाडु के सभी शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों, सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में आयोजित कार्यक्रमों की शुरुआत में तमिल थाई वाजथु का गायन अनिवार्य रूप से किया जाएगा।"

इस प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि तमिल दुनिया की सबसे पुरानी शास्त्रीय भाषाओं में से एक है और तमिल सभ्यता को दुनिया की सबसे पुरानी सांस्कृतिक परंपराओं में से एक बताया गया है। तमिलनाडु ने सबसे पहले 23 नवंबर, 1970 को जारी एक सरकारी आदेश के जरिए यह निर्देश दिया था कि सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में तमिल थाई वाजथु गाया जाए।

राज्य सरकार ने 12 दिसंबर, 2021 को औपचारिक रूप से इस गीत को राज्य गीत का दर्जा दिया और पूरे राज्य में सरकारी कार्यक्रमों और संस्थानों में इसे गाना अनिवार्य कर दिया। तमिल थाई वाजथु, 1891 में मनोन्मनीयम सुंदरनार द्वारा लिखे गए नाटक मनोन्मनीयम से ली गई मदर तमिल (तमिल भाषा की देवी) की स्तुति है।

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