परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव लाएगी विजय सरकार, मीटिंग में 57 में से 21 सांसद पहुंचे; DMK-AIADMK ने बनाई दूरी
तमिलनाडु सरकार केंद्र के लोकसभा सीटों के परिसीमन प्रस्ताव का कड़ा विरोध कर रही है, विधानसभा में प्रस्ताव लाने की तैयारी है।

तमिलनाडु विधानसभा में परिसीमन के खिलाफ लाया जाएगा प्रस्ताव (फोटो-पीटीआई)
HighLights
तमिलनाडु सरकार लोकसभा सीटों के परिसीमन का विरोध करेगी।
विधानसभा में परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव लाया जाएगा।
तमिलनाडु की 39 सीटें यथावत रखने, परिसीमन फ्रीज करने की मांग।
डिजिटल डेस्क, चेन्नई। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित लोकसभा सीटों के परिसीमन के मुद्दे पर तमिलनाडु की राजनीति गरमा गई है। मुख्यमंत्री सी. जोसफ विजय की अध्यक्षता में हुई सत्ताधारी गठबंधन और मित्र दलों के सांसदों की एक उच्चस्तरीय बैठक में केंद्र की इस योजना का पुरजोर विरोध करने का एकसम्मत और कड़ा निर्णय लिया गया है।
'राज्य के हितों पर कुठाराघात' बताते हुए टीवीके सरकार ने मांग की है कि लोकसभा सीटों की संख्या 543 और तमिलनाडु के हिस्से की 39 सीटें यथावत रखी जाएं तथा 'परिसीमन फ्रीज' को अगले 25 वर्षों के लिए और बढ़ाया जाए।
परिसीमन के खिलाफ विधानसभा में लाएंगे प्रस्ताव
तमिलनाडु की सभी पार्टियों के सांसदों और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के बीच हुई बैठक के बाद, तमिलनाडु सरकार राज्य में परिसीमन (सीटों के पुनर्निर्धारण) की प्रक्रिया शुरू करने के किसी भी कदम पर औपचारिक रूप से अपनी आपत्ति जताने के लिए विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित करेगी।
सूत्रों के मुताबिक, नेताओं ने एकजुट होकर किसी भी परिसीमन प्रक्रिया का विरोध करने का फैसला किया। उनका तर्क है कि राज्य कम से कम 40-50 वर्षों तक चुने हुए प्रतिनिधियों की सीटों की संख्या में बदलाव का बोझ नहीं उठा सकता।
कांग्रेस सांसद जोतिमणि ने कहा, 'हम परिसीमन का समर्थन नहीं करेंगे। मुख्यमंत्री विजय ने यह सर्वदलीय बैठक बुलाकर बहुत अच्छा कदम उठाया है। अगर परिसीमन लागू किया जाता है, तो लोकतंत्र अपने असली स्वरूप में नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु के लोगों के हितों और अधिकारों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।'
'बदलाव की कोई आवश्यकता नहीं'
बैठक के बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने स्पष्ट किया कि वर्तमान परिस्थितियों में जनप्रतिनिधियों की संख्या में कोई बदलाव की आवश्यकता नहीं है।
आर. निर्मल कुमार ने केंद्र की भाजपा सरकार पर चुनावी गणित साधने और आसान जीत हासिल करने के उद्देश्य से परिसीमन थोपने का गंभीर आरोप लगाया। चर्चा में कांग्रेस, वीसीके, एमडीएमके, आइयूएमएल, भाकपा और माकपा सहित विभिन्न दलों के कुल 19 सांसदों ने हिस्सा लिया।
हालांकि, मुख्य विपक्षी दल द्रमुक और प्रमुख विपक्षी दल अन्नाद्रमुक ने इस बैठक का बहिष्कार किया। द्रमुक ने इसे "प्रहसन" और अन्नाद्रमुक ने "बाजीगरी भरा नाटक" करार दिया।
राजनीतिक विरोध के बावजूद वीसीके प्रमुख व सांसद थोल थिरुमावलवन और कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने विश्वास जताया कि राज्य के सभी दल परिसीमन के मुद्दे पर अंततः एक ही सुर में तमिलनाडु के अधिकारों की रक्षा के लिए खड़े होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परिसीमन लागू होता है, तो जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दक्षिण भारतीय राज्यों, विशेषकर तमिलनाडु का संसद में प्रतिनिधित्व और राजनीतिक प्रभाव कम हो सकता है। यही कारण है कि तमिलनाडु की राजनीति में इस प्रस्ताव को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
परिसीमन के पूरी तरह खिलाफ नहीं है द्रमुक
द्रमुक सांसद कनीमोरी ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी परिसीमन के पूरी तरह खिलाफ नहीं है, बल्कि वह एक निष्पक्ष प्रक्रिया की मांग करती है। उन्होंने कांग्रेस सांसदों के उस आरोप का जवाब दिया जिसमें उन्होंने द्रमुक पर मुख्यमंत्री के सर्वदलीय सांसदों की बैठक का बहिष्कार करने की आलोचना की थी।
कनीमोरी ने कहा कि द्रमुक का विरोध केवल उस अभ्यास से है जिससे संसद में तमिलनाडु की आवाज कम हो सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी को अपने राजनीतिक वजूद या तमिलनाडु के अधिकारों के लिए लड़ने के इतिहास पर कांग्रेस से किसी सीख की जरूरत नहीं है। द्रमुक के लिए चुनावी जीत से ज्यादा तमिलनाडु के अधिकारों की रक्षा करना सर्वोपरि है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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