'मदुरै को मणिपुर में बदलने की कोशिश...', दीपन विवाद पर CM स्टालिन का भाजपा पर निशाना
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने NDA पर क्षेत्रीय गौरव, वित्तीय अन्याय और सामाजिक सद्भाव को लेकर हमला किया।
HighLights
स्टालिन ने NDA पर क्षेत्रीय गौरव और वित्तीय अन्याय का आरोप लगाया
थिरुपरनकुंड्रम 'दीपम' विवाद पर भाजपा को घेरा
मदुरै को मणिपुर बनाने की कोशिश का आरोप लगाया
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के ठीक पहले सियासी सरगर्मी अपने चरम पर है। सोमवार को मुख्यमंत्री एम. के.स्टालिन ने एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए, क्षेत्रीय गौरव, वित्तीय अन्याय और सामाजिक सद्भाव को लेकर NDA पर जोरदार हमला किया।
थिरुपरनकुंड्रम में विवादित 'दीपम' मुद्दे का जिक्र करते हुए, स्टालिन ने चल रही कानूनी खींचतान की ओर इशारा किया। यह सब ऐसे समय में हो रहा है, जब मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने पहाड़ी के खंभे के ऊपर और मंदिर के पास, दोनों जगहों पर दीपक जलाने की अनुमति दे दी।
मंदिर प्रशासन और राज्य सरकार की चुनौती
मंदिर प्रशासन और राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती दी है, जबकि आदेश का पालन न होने पर 'अवमानना' के सवाल भी उठाए गए हैं। जिससे यह मुद्दा राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है।
स्टालिन ने कहा कि मदुरै में सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कहा, 'शांति और भाईचारा तमिलनाडु के DNA में है। लेकिन NDA इसे खत्म करना चाहती है।' उन्होंने आरोप लगाया कि BJP एक 'विभाजनकारी 'आर्यन मॉडल' को बढ़ावा दे रही है और उसने मदुरै को मणिपुर बनाने की कोशिश की है।'
स्टालिन ने मदुरै के लोगों को दिया श्रेय
CM स्टालिन ने ऐसे प्रयासों का विरोध करने के लिए मदुरै के लोगों को श्रेय दिया। उन्होंने कहा, 'मदुरै के लोग समझदार हैं। आपने टकराव भड़काने की साजिशों को प्रभावी ढंग से नाकाम कर दिया है।'
स्टालिन ने पूछा, 'तमिलनाडु का पैसा सीधे लोगों तक पहुंचता है। लेकिन तमिलनाडु द्वारा चुकाया गया टैक्स कहां जाता है?' उन्होंने पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा, 'यह बताएं कि तमिलनाडु द्वारा चुकाए गए हर एक रुपये के बदले उसे कितना पैसा वापस मिलता है। अगर यह तुलना सार्वजनिक की जाए, तो केंद्र सरकार का असली चेहरा सामने आ जाएगा।'
अपने हमले को और तेज करते हुए स्टालिन ने कहा, 'अगर तमिलनाडु को भी BJP-शासित राज्यों के अनुपात में ही पैसा दिया जाए, तो हम अपना कर्ज चुका सकते हैं और हम पर कोई वित्तीय दबाव नहीं रहेगा।' बता दें, तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान होगा। वोटों की गिनती 4 मई को की जाएगी।
