मुंबई, प्रेट्र। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) ने कहा है कि डिफॉल्ट कर चुके को-ऑपरेटिव बैंकों के ग्राहकों ने 14,100 करोड़ रुपये के दावे किए हैं। बड़े घोटाले का सामने करने वाले पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव (पीएमसी) बैंक के ग्राहक भी इसमें शामिल हैं। यह दावे डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (डीआइसीजीसी) के पास आए हैं। हालांकि केंद्रीय बैंक ने कहा है कि सभी दावों की पूर्ति करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

 डीआइसीजीसी के पास मौजूद इन दावों में स्टेट को-ऑपरेटिव बैंकों और जिला को-ऑपरेटिव बैंकों का हिस्सा 3,414 करोड़ रुपये है। शहरी को-ऑपरेटिव बैंकों की हिस्सेदारी 10,684 करोड़ रुपये है। इसमें पीएमसी के ग्राहकों के दावे भी शामिल हैं। आरबीआइ द्वारा पीएमसी बैंक से निकासी पर रोक लगाने के बाद डीआइसीजीसी काफी चर्चा में आया था।

लंबे समय से दबाव में चल रहे को-ऑपरेटिव बैंकों के संकट को पीएमसी बैंक घोटाले ने और बढ़ा दिया था। करीब 6,500 करोड़ रुपये के पीएमसी बैंक घोटाले में इसके कुल असेट का 73 परसेंट हिस्सा शामिल है। इस मामले में पीएमसी बैंक और दिवालिया प्रक्रिया का सामना कर रही एचडीआइएल आपसी गठजोड़ करके 2008 से फंड का गबन कर रहे थे। यह मामला इसी वर्ष सितंबर में बैंक के ही एक अधिकारी द्वारा किए गए विरोध के बाद सामने आया था।

आरबीआइ द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि कमजोर और निर्देशों के तहत लिए गए बैंकों का लिक्विडेशन किया जाएगा। इसके अलावा कमजोर बैंकों को पुनर्जीवन भी मिल सकता है। गौरतलब है कि इस वर्ष की शुरुआत में 30 से अधिक को-ऑपरेटिव बैंकों को आरबीआइ की देखरेख के दायरे में लाया गया था।

पीएमसी बैंक की निरीक्षण रिपोर्ट को अंतिम रूप देना बाकी

नई दिल्ली। आरबीआइ ने कहा है कि घोटाले से जूझ रहे पीएमसी बैंक की निरीक्षण रिपोर्ट को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। एक आरटीआइ का जवाब देते हुए केंद्रीय बैंक ने कहा कि प्राथमिक जांच के दौरान पीएमसी बैंक में गंभीर अनियमितताएं सामने आई थी। इसके बाद बैंक के बोर्ड को भंग करके इसे आरबीआइ के अधीन ले लिया था। हालांकि आरबीआइ ने नियमों का हवाला देते हुए बैंक की शिकायतों की प्रतियां देने से इन्कार कर दिया है।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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