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CEC नियुक्ति कानून पर फैसले को वापस लेने की याचिका पर सीजेआई करेंगे फैसला

Published: Wed, 07 Oct 2026 01:30 PM (GMT+05:30)Updated: Wed, 07 Oct 2026 02:15 PM (GMT+05:30)

सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून पर दिए गए फैसले को वापस लेने के लिए एक याचिका दायर ...और पढ़ें

मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून पर  CJI करेंगे फैसला (जागरण)

मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून पर CJI करेंगे फैसला (जागरण)

HighLights

  1. CEC नियुक्ति कानून पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हुई।

  2. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अर्जी की जांच करने को कहा।

  3. यह याचिका 23 सितंबर के फैसले को वापस लेने के लिए है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति कानून पर फैसले को वापस लेने की याचिका दायर की गई है। इस याचिका पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने आज बुधवार को कहा, 'इस अर्जी की जांच करेंगे।'

सीनियर वकील गोपाल शंकरनारायणन ने CJI के सामने यह अर्जी रखी। उन्होंने साफ किया कि यह एक इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन (IA) है, जिसे 23 सितंबर के फैसले को वापस लेने के लिए दायर किया गया है।

यह फैसला जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनाया था।

CJI करेंगे फैसला

CJI ने इस मामले पर विचार करने की सहमति देते हुए कहा, 'हम जांच करेंगे और फिर फैसला लेंगे।' CJI ने यह भी कहा कि उन्होंने पढ़ा है कि एक क्यूरेटिव पिटीशन भी दायर की गई है।

सीनियर वकील शंकरनारायणन ने हां में जवाब दिया और कहा, 'इसे किसी दूसरी पार्टी ने दायर किया है, लेकिन क्यूरेटिव पिटीशन से पहले रिव्यू पिटीशन दायर होनी चाहिए।'

सीनियर वकील ने बताया कि उनका मामला एक IA (इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन) है। यह एप्लीकेशन इस आधार पर दायर की गई थी कि बेंच में शामिल जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा के पक्षपाती होने की वाजिब आशंका थी, क्योंकि उनके बेटे भारत के चुनाव आयोग के लिए स्टैंडिंग काउंसिल हैं।

CEC कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर अलग-अलग राय

23 सितंबर को, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एससी शर्मा की बेंच ने इस बात पर अलग-अलग राय रखी कि क्या CEC कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी बेंच के पास भेजा जाना चाहिए।

एक तरफ जहां जस्टिस दत्ता का कहना था कि ऐसा करना जरूरी नहीं है, वहीं जस्टिस शर्मा की राय अलग थी। हालांकि, आखिरकार बेंच ने मामले को 5 जजों की बेंच के पास भेज दिया और इसे CJI के सामने रखा।

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