CISF ने 8 नए सेक्टरों के साथ सुरक्षा ढांचा बदला, ड्रोन-साइबर हमलों से निपटने की तैयारी
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने देश के महत्वपूर्ण संस्थानों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव किया है।

8 नए सेक्टर के साथ बदला CISF का सुरक्षा ढांचा

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के महत्वपूर्ण संस्थानों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और मजबूत करने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव कर दिया है।
पहले जहां सुरक्षा की निगरानी मुख्य रूप से भौगोलिक क्षेत्रों के आधार पर होती थी, वहीं अब संस्थानों के काम और उनकी जरूरत के अनुसार सुरक्षा देने की व्यवस्था अपनाई गई है। नई व्यवस्था रविवार से लागू हो गई है।
गृह मंत्रालय की सहमति से किए गए इस बदलाव का उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना, विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और उभरते खतरों से निपटने की क्षमता बढ़ाना है।
बदलाव के तहत बिजली संयंत्र, कोयला खदान, इस्पात कारखाने, तेल एवं गैस प्रतिष्ठान और बंदरगाह जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा के लिए अलग-अलग सेक्टर बनाए गए हैं। आठ नए सेक्टर शुरू किए गए हैं। इनमें पावर-एक (नई दिल्ली), पावर-दो (कोलकाता), कोयला (रांची), इस्पात (भिलाई), पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस (गुवाहाटी), पश्चिमी तट बंदरगाह (मुंबई), पूर्वी तट बंदरगाह (चेन्नई), तथा सरकारी इमारतें, संग्रहालय, स्मारक एवं मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (नई दिल्ली) शामिल हैं। ये सेक्टर पहले से कार्यरत एविएशन सेक्टर और परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष विभाग (डीएई एवं डीओएस) सेक्टर के साथ काम करेंगे।
पहले क्षेत्रीय कमान व्यवस्था के तहत एक सेक्टर अलग-अलग क्षेत्र के 50 से अधिक संस्थानों की सुरक्षा की निगरानी करता था। ऐसे में अलग-अलग विभागों और संस्थानों के साथ तालमेल बनाने में कठिनाई आती थी। नई व्यवस्था के तहत सेक्टर मुख्यालयों को अलग-अलग उद्योगों से जुड़ी परिचालन जरूरतों, कमजोरियों और सुरक्षा चुनौतियों की गहरी समझ विकसित करने में मदद मिलेगी।
नई प्रणाली के तहत ड्रोन हमलों, साइबर हमलों और अन्य संभावित खतरों से निपटने के लिए विशेष रणनीति तैयार की जाएगी। साथ ही आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाकर देश के महत्वपूर्ण संस्थानों को अधिक सुरक्षित बनाया जाएगा।
सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने कहा कि नई व्यवस्था से विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल बेहतर होगा और जरूरी फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे। इससे अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होगी।
(न्यूज एजेंसी एएनआई के इनपुट के साथ)