सीआईडी का एक्शन: फर्जी हस्ताक्षर मामले में घिरे अभिषेक बनर्जी, जांच एजेंसी ने पूछे कई सवाल
बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चयन से जुड़े फर्जी हस्ताक्षर मामले में सीआईडी ने गुरुवार शाम तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से लंबी पूछताछ की।

फर्जी हस्ताक्षर मामले में सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी से की लंबी पूछताछ (फोटो- एएनआई)
HighLights
हवाई अड्डे पर लोगों ने टीएमसी सांसद के खिलाफ लगाए ‘सिग्नेचर चोर’ के नारे
हाई कोर्ट ने अभिषेक को किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से प्रदान की अंतरिम राहत
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चयन से जुड़े फर्जी हस्ताक्षर मामले में सीआईडी ने गुरुवार शाम तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से लंबी पूछताछ की।
इससे पहले अभिषेक ने जांच एजेंसी के सामने पेश होने के लिए मिले तीन नोटिस को नजरअंदाज कर दिया था, जिसके लिए उन्होंने बीमारी और कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती याचिका दायर करने का हवाला दिया था। समाचार लिखे जाने तक अभिषेक से पूछताछ जारी थी।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने मामले में अभिषेक को किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम राहत प्रदान की। न्यायमूर्ति कौशिक चंद ने दो सप्ताह के लिए अंतरिम संरक्षण देते हुए बनर्जी को निर्देश दिया कि वह मामले में पूछताछ के लिए गुरुवार शाम छह बजे तक कोलकाता स्थित सीआईडी मुख्यालय में उपस्थित हों।
अभिषेक के दिल्ली से कोलकाता आने पर हवाई अड्डे पर कुछ नाराज लोगों ने उनके खिलाफ ‘सिग्नेचर चोर’ के नारे लगाए। यह विवाद तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता द्वारा उनके कालीघाट स्थित आवास पर बुलाई गई एक बैठक से जुड़ा है, जिसमें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के नाम पर चर्चा की गई थी।
आरोप है कि इस संबंध में तैयार किए गए दस्तावेजों पर कई विधायकों के हस्ताक्षर उनकी अनुपस्थिति के बावजूद कर दिए गए। इन आरोपों के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी।
पार्टी की ओर से स्पीकर को सौंपे गए पत्र में हस्ताक्षर अभिषेक बनर्जी के थे। इस कारण वह भी जांच के दायरे में हैं। दूसरी ओर शिक्षक नियुक्ति भ्रष्टाचार मामले में सीआईडी ने गुरुवार को मुर्शिदाबाद के बहरमपुर क्षेत्र के पूर्व तृणमूल विधायक जीवनकृष्ण साहा के आवास पर तलाशी अभियान चलाया।
अभिषेक के आवास के अवैध हिस्से पर जल्द चल सकता है बुलडोजरअभिषेक के आवास शांतिनिकेतन भवन समेत 21 संपत्तियों को जारी नोटिस के 24 दिन बाद नगर प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।
कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश और शहरी विकास विभाग की मंजूरी के बाद अवैध निर्माण की स्थिति पर डीजी से रिपोर्ट तलब की गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद भवन के अवैध हिस्से को ध्वस्त करने पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
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