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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 08, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

दक्षिण चीन सागर पर चीन ने US को दी सलाह, पहले जानें इतिहास फिर दें बयान

By Lalit RaiEdited By:
Published: Wed, 08 Feb 2017 01:47 PM (IST)Updated: Wed, 08 Feb 2017 02:49 PM (IST)

दक्षिण चीन सागर पर चीन ने अमेरिका से कहा कि पहले इतिहास पढ़कर आइए फिर चीन को समझाने की कोशिश करिये।

दक्षिण चीन सागर पर चीन ने US को दी सलाह, पहले जानें इतिहास फिर दें बयान
दक्षिण चीन सागर पर चीन ने US को दी सलाह, पहले जानें इतिहास फिर दें बयान

नई दिल्ली(जेएनएन)। दक्षिण चीन सागर और वन चाइना पॉलिसी के मुद्दे पर चीन और अमेरिकी प्रशासन आमने-सामने हैं। अमेरिका ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि दक्षिण चीन सागर और चीन की विस्तारवादी नीति का वो विरोध करता रहेगा। लेकिन अमेरिका की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए चीन ने कहा कि यूएस में जो अधिकारी बैठे हुए हैं, उन्हें एक बार फिर इतिहास पढ़ने की जरूरत है। चीन के विदेश मंत्री वैंग यी ने कहा कि दूसरे विश्वयुद्ध के बाद ये साफ कहा गया था कि चीन के वो इलाके जो जापान के कब्जे में हैं उन्हें चीन को दोबारा वापस दे दिया जाएगा।

दक्षिण चीन सागर पर अमेरिका-चीन आमने-सामने

अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट रेक्स टिलरसन ने कहा कि दक्षिण चीन सागर में चीन द्वारा बनाए गए विवादित द्वीपों पर जाने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए। ह्वाइट हाउस सामरिक तौर से महत्वपूर्ण द्वीपों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि यूएस के डिफेंस सेक्रेटरी जिम मैटी ने पिछले हफ्ते कहा कि दक्षिण चीन सागर के विवादित मुद्दों को कूटनीतिक तौर पर सुलझाने की जरूरत है।

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'अमेरिकी पहले पढ़ें इतिहास'

चीन के विदेश मंत्री वैंग यी ने कहा कि वो अपने अमेरिकी दोस्तों को एक सलाह देते हैं। अमेरिकी दोस्तों को पहले 1943 के कायरो घोषणापत्र और 1945 में पॉटसडैम समझौते को पढ़ना चाहिए। उन समझौतों में साफ तौर पर ये लिखा गया है कि दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान जापान के कब्जे में जो द्वीप चले गए थे, उन्हें जापान वापस कर देगा। विवाद की जड़ में स्पार्टी आइलैंड है जिसे चीन नैंशा द्वीप के नाम से पुुकारता है।

'विवाद का समाधान है कूटनीति'

दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर अमेरिकी रक्षा मंत्री के बयान पर वैंग यी ने कहा कि चीन का स्पष्ट मत है कि विवादित मुद्दों को कूटनीतिक ढंग से सुलझाना चाहिए। उन्होंने कहा वैश्विक शांति हो या क्षेत्रीय स्तर पर शांति हो चीन कभी भी टकराव का रास्ता नहीं चुनता है। लेकिन चीन अपने संप्रभु अधिकारों का उचित तरीके से इस्तेमाल करता रहेगा।

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