भारत का दूसरा सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार है चीन, दोनों देशों के बीच क्या खरीदा-बेचा जाता है? पूरी डिटेल
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और शी चिनफिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता में भारत-चीन व्यापार घाटे पर चर्चा हुई।

BRICS शिखर सम्मेलन में भारत-चीन के बीच द्विपक्षीय बातचीत (फोटो-पीटीआई)
HighLights
पीएम मोदी और शी चिनफिंग ने ब्रिक्स में द्विपक्षीय वार्ता की।
भारत-चीन व्यापार घाटा बढ़कर 99.19 अरब डॉलर हुआ।
भारत की चीन पर औद्योगिक उत्पादों हेतु निर्भरता बढ़ी।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई। इसमें दोनों देशों के बीच व्यापार और बढ़ते व्यापार घाटे पर भी चर्चा हुई। चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार है।
दोनों देशों के बीच व्यापार की मौजूदा स्थिति को आंकड़ों में समझें
- व्यापार कितना बढ़ाकुल व्यापार: 2024-25 में 118.39 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 127.7 अरब डॉलर हो गया।
- बढ़ोतरी: एक साल में व्यापार में करीब 7.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
- व्यापार घाटा: 2024-25 के 85 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 99.19 अरब डॉलर हो गया।
पिछले कुछ वर्षों में व्यापार घाटा लगातार बढ़ा है:
- 2023-24 : 83.2 अरब डॉलर
- 2022-23 : 73.3 अरब डॉलर
- 2021-22 : 44 अरब डॉलर
- 2020-21 : 48.64 अरब डॉलर
- 2019-20 : 53.56 अरब डॉलर
भारत चीन को क्या बेचता है?
चीन को भारत का निर्यात 2024-25 के 14.25 अरब डॉलर से 36.62 प्रतिशत बढ़कर 2025-26 में 19.47 अरब डॉलर हो गया। भारत के कुल निर्यात में चीन की हिस्सेदारी भी 3.2 प्रतिशत से बढ़कर 4.4 प्रतिशत हो गई।
चीन से भारत क्या मंगाता है?
2025 में चीन से भारत के आयात में करीब 98.5 प्रतिशत हिस्सा औद्योगिक उत्पादों का था।इलेक्ट्रानिक्स, मशीनरी, कंप्यूटर और आर्गेनिक केमिकल मिलकर करीब 66 प्रतिशत आयात के लिए जिम्मेदार रहे। इन चार श्रेणियों का आयात करीब 82.6 अरब डॉलर का रहा।
भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स आयात में चीन की हिस्सेदारी करीब 43 प्रतिशत है।मशीनरी और कंप्यूटर आयात में चीन की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत है।
आर्गेनिक केमिकल के आयात में चीन की हिस्सेदारी करीब 44 प्रतिशत है।
कुल आयात में चीन की हिस्सेदारी
भारत के कुल माल आयात में चीन की हिस्सेदारी 2024-25 के 15.7 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में करीब 17 प्रतिशत हो गई।वहीं भारत के कुल निर्यात में चीन की हिस्सेदारी 3.2 प्रतिशत से बढ़कर 4.4 प्रतिशत हुई।
व्यापार घाटा क्यों बढ़ रहा है?
भारत की चीन पर निर्भरता सिर्फ तैयार सामान तक सीमित नहीं है। बड़ी मात्रा में कच्चा माल, मध्यवर्ती सामान और पूंजीगत सामान भी चीन से आता है।
इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स, ईवी बैटरी, सोलर माड्यूल, एपीआइ (दवाओं का कच्चा माल), विशेष रसायन, ऑटो कंपोनेंट्स, मशीनरी और मोबाइल फोन के पार्ट्स शामिल हैं।
इनका इस्तेमाल भारत में तैयार उत्पाद बनाने में होता है। यानी चीन से आने वाला काफी सामान भारतीय उद्योग के लिए उत्पादन प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा है।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआइ) के मुताबिक, इन उत्पादों को अचानक दूसरे देशों से मंगाना आसान नहीं है। इसलिए चीन से आयात कम करने की कोशिशों के बावजूद भारतीय विनिर्माण की सप्लाई चेन चीन से जुड़ी हुई है।
चीन से निवेश कितना आया?
अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच भारत को चीन से 2.51 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) मिला।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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