वाशिंगटन, प्रेट्र। साइबर क्राइम के खिलाफ अमेरिका में व्हाइट हाउस ने आनलाइन मीटिंग का आयोजन किया। इसमें दुनिया के कुल 30 देशों ने हिस्सा लिया और इस आनलाइन अपराध को रोकने पर अपने विचार प्रकट कि  या। व्हाइट हाउस द्वारा आयोजित दो दिन की इस वर्चुअल मीटिंग में चीन और रूस ने हिस्सा नहीं लिया।

आनलाइन अपराधों को रोकने के लिए दुनिया के 30 देशों ने पहली बार रोकथाम के तरीकों पर विचार किया। अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में हुई बैठक में भारत ने भी भाग लिया। दुनिया के देशों ने साइबर क्राइम को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने, प्राथमिकताएं तय किए जाने और खतरों को कम करने के लिए निर्णय लिए जाने की आवश्यकता जताई। 

बैठक की समाप्ति पर जारी संयुक्त बयान में 30 देशों ने कहा, फिरौती के लिए होने वाला आनलाइन अपराध आर्थिक जगत के साथ ही देशों की सुरक्षा के लिए भी बेहद खतरनाक है। इसमें आंकड़ों की चोरी कर उनका किसी भी हद तक जाकर दुरुपयोग किया जा सकता है। भारत ने इस बैठक के आयोजन में प्रमुख भूमिका अदा की। देशों ने आपसी समन्वय से इस तरह के अपराधों की रोकथाम के लिए अधिकतम प्रयास किए जाने की आवश्यकता जताई। उन देशों के खिलाफ कार्रवाई पर बल दिया जिन्हें साइबर अपराध करने वालों की सुरक्षित शरणगाह माना जाता है।

बैठक में अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलीवान ने कहा, कोई भी देश साइबर क्राइम को अकेले नहीं रोक सकता। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर समन्वित प्रयास किए जाने की जरूरत है, तभी इस तरह के अपराधों को रोका जा सकता है। इसी के साथ बाइडन प्रशासन ने साइबर क्राइम को रोकने के लिए भविष्य में गठजोड़ बनाए जाने के संकेत दिए। बैठक में साइबर क्राइम को रोकने के लिए जवाबी तंत्र तैयार करने पर बल दिया गया। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) जैसा तंत्र विकसित किए जाने की आवश्यकता जताई गई।

Edited By: Monika Minal