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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 01, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Assam: 'असम के लोगों को सुरक्षित करने के लिए बनाया गया ULFA समझौता', सीएम सरमा ने पीएम मोदी और अमित शाह को किया धन्यवाद

By Agency Edited By: Nidhi Avinash
Published: Mon, 01 Jan 2024 05:21 PM (IST)

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को कहा कि उल्फा समझौता असम के लोगों को सुरक्षित करने के ...और पढ़ें

सीएम सरमा ने ULFA समझौते के लिए पीएम मोदी और अमित शाह को किया धन्यवाद (Image: ANI)
सीएम सरमा ने ULFA समझौते के लिए पीएम मोदी और अमित शाह को किया धन्यवाद (Image: ANI)

एएनआई, गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को कहा कि उल्फा समझौता असम के लोगों को सुरक्षित करने के लिए बनाया गया है। उन्होंने बताया कि इस समझौते के माध्यम से राज्य में लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।

गुवाहाटी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, 'मैं इसके लिए पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद देता हूं। हमने असम के लोगों को सुरक्षित करने के लिए इस समझौते का साधन बनाया। मैं राज्य के स्वदेशी लोगों के राजनीतिक अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए उल्फा के वार्ता समर्थक गुट को धन्यवाद देता हूं।'

आतंकवाद को खत्म करने के लिए उठाए कड़े कदम

असम के मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि उनके कार्यकाल में उनकी सरकार ने राज्य में आतंकवाद को कम करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। 2023 में कुल दो शांति समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इस सरकार के शासनकाल में उग्रवादियों के साथ 11 शांति समझौते पर हस्ताक्षर किये गये हैं। उग्रवाद का युग लगभग खत्म हो चुका है। कुल 3,842 उग्रवादी कैडर मुख्यधारा में वापस आ गए हैं।'

उल्फा (आई) के नेता परेश बरुआ के सपंर्क में सीएम सरमा

असम के सीएम ने यह भी बताया कि वह उल्फा (आई) के नेता परेश बरुआ के संपर्क में हैं और उम्मीद जताई कि वह आने वाले दिनों में अपनी लंबे समय से चली आ रही मांगों को बदल देंगे। परेश बरुआ के नेतृत्व वाला प्रतिबंधित उल्फा-इंडिपेंडेंट राज्य में एकमात्र प्रमुख विद्रोही संगठन बचा है।

सीएम सरमा ने कहा कि मेरी परेश बरुआ से हर 3-6 महीने में फोन पर बात होती थी। 90 प्रतिशत उल्फा नेता और कैडर अब शांति प्रक्रिया में आ गए हैं। मेरा मानना है कि निरंतर चर्चा और बातचीत से एक नया रास्ता खुलेगा और मांगों की संख्या कम होगी।

त्रिपक्षीय समझौता

इससे पहले, यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के वार्ता समर्थक गुट ने शुक्रवार को केंद्र और असम सरकार के साथ एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें उसके सशस्त्र कैडरों द्वारा कब्जा किए गए सभी शिविरों को खाली करने पर सहमति व्यक्त की गई।

कानून द्वारा स्थापित शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल हों और देश की अखंडता बनाए रखें। समझौते पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उल्फा के वार्ता समर्थक प्रतिनिधिमंडल के 29 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए, जिसमें 16 उल्फा सदस्य और नागरिक समाज के 13 सदस्य शामिल थे।

अलगाववादी उल्फा का गठन अप्रैल 1979 में हुआ

अलगाववादी उल्फा का गठन अप्रैल 1979 में बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) से आए बिना दस्तावेज वाले अप्रवासियों के खिलाफ आंदोलन के बाद हुआ था। फरवरी 2011 में यह दो समूहों में विभाजित हो गया, अरबिंद राजखोवा के नेतृत्व वाले गुट ने हिंसा छोड़ दी और सरकार के साथ बिना शर्त बातचीत के लिए सहमत हो गया। दूसरे पुनर्ब्रांडेड उल्फा-स्वतंत्र गुट का नेतृत्व करने वाले परेश बरुआ बातचीत के खिलाफ हैं।

वार्ता समर्थक गुट ने असम के मूल लोगों की पहचान और संसाधनों की सुरक्षा के लिए संवैधानिक और राजनीतिक सुधारों की मांग की है, जिसमें उनकी भूमि का अधिकार भी शामिल है। केंद्र सरकार ने अप्रैल में इसे समझौते का मसौदा भेजा था। दोनों पक्षों के बीच इससे पहले दौर की बातचीत अगस्त में दिल्ली में हुई थी

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