अंबिकापुर, असीम सेन गुप्ता। सरगुजा संभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्यवाही में लगे निरीक्षक शरद सिंह नक्सल मोर्चे पर अदम्य वीरता और साहस का परिचय दे चुके हैं। वे एक ऐसे पुलिस अधिकारी के रूप में चर्चित हैं जिन्होंने बतौर आरक्षक जिस थाने में सेवा दी थी उसी थाने में कुछ वर्षों बाद ही उन्हें प्रभारी के रूप में कार्य करने का अवसर मिला था। यह अवसर नक्सलियों के खिलाफ सफलतापूर्वक ऑपरेशन पूरा करने के कारण आउट ऑफ टर्न प्रमोशन की वजह से मिला। वीरता और साहस के लिए कई पुरस्कारों से नवाजे गए निरीक्षक शरद सिंह ने दक्षिण छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया है।

सरगुजा के रहने वाले शरद सिंह ने सबसे पहले छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल में आरक्षक के रूप में कार्यभार संभाला था। 10 सितंबर 2003 को उन्हें सशस्त्र बल में कार्य करने का अवसर मिला था। उस दौरान उन्होंने बस्तर पुलिस रेंज के सुकमा जिले के कोंटा थाने में बतौर आरक्षक अपनी सेवाएं दी। लगभग 4 वर्षों तक वे छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल में सेवा देते रहे। वर्ष 2007 में जब छत्तीसगढ़ पुलिस में भर्ती शुरू हुई तो उन्होंने इसमें हिस्सा लिया। सरगुजा जिला पुलिस बल में वर्ष 2007 में उनकी नियुक्ति हुई। सरगुजा जिले के सीतापुर और अंबिकापुर थाने में आरक्षक के पद पर कार्य करने के दौरान लूटपाट करने वाले शातिर अपराधियों की धरपकड़ करने के साथ ही मादक पदार्थों की अवैध बिक्री करने वालों के खिलाफ भी प्रभावी कार्यवाही करने वाले पुलिस टीम का हिस्सा रहे। बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कार्य के लिए वन टाइम प्रमोशन की शुरुआत हुई तो उन्होंने नक्सलियों के खिलाफ अभियान में कार्य करने के मिले अवसर को स्वीकार कर लिया।

वर्ष 2012 में बतौर उप निरीक्षक बस्तर में अपनी सेवाएं दी। बीजापुर,बासागुड़ा, गंगालूर जैसे घोर नक्सल प्रभावित इलाकों में उन्होंने हर चुनौती का डटकर मुकाबला किया। डीआरजी प्रभारी और नक्सल सेल प्रभारी के रूप में उनके नेतृत्व में कई सफल मुठभेड़ में पुलिस ने नक्सलियों को मार गिराया। वर्ष 2017 शरद सिंह के लिए बेहद खास रहा जब उन्हें सुकमा जिले के कोंटा थाना प्रभारी के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। उस दौरान उन्हें निरीक्षक के पद पर प्रमोशन मिल चुका था। इसी कोंटा थाने में लगभग 14 साल पहले वे आरक्षक के रूप में सेवा दे चुके थे। उसी थाना में प्रभारी के रूप में कार्य करने के मिले अवसर को उन्होंने सुखद अनुभव माना और क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों पर विराम लगाने प्रभावी कार्रवाई की। बस्तर पुलिस रेंज में सेवा दे कर नक्सलियों के खिलाफ अदम्य साहस का परिचय देने वाले पुलिस अधिकारियों में शरद सिंह का नाम प्रमुख है। लगभग 17 वर्षों की सेवा में ज्यादातर समय उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ही बिताया है।

24 नक्सलियों को किया ढेर,डेढ़ सौ से अधिक को किया गिरफ्तार

बस्तर पुलिस रेंज में नक्सलियों के खिलाफ अभियान को अवसर मानते हुए शरद सिंह ने एक के बाद एक कई सफल मुठभेड़ को अंजाम दिया। उन्होंने बस्तर पुलिस रेंज में 24 नक्सलियों को ढेर किया है। डेढ़ सौ से अधिक नक्सलियों को गिरफ्तार करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनकी पहल पर आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की संख्या भी काफी अधिक है। छत्तीसगढ़ के मैदानी क्षेत्र के बजाय नक्सल प्रभावित इलाकों में कार्य करने के दौरान उन्होंने अधीनस्थ कर्मचारियों का भी हमेशा हौसला बढ़ाया। शरद सिंह एक ऐसे पुलिस अधिकारी के रूप में चर्चित रहे हैं जिन्होंने मैदानी क्षेत्र के बजाय नक्सल क्षेत्र में कार्य करने को प्राथमिकता दी।

केंद्रीय रिजर्व बल का चार महानिदेशक पदक से नवाजे गए

नक्सलियों के खिलाफ प्रभावी कार्यवाही करने की वजह से निरीक्षक शरद सिंह को केंद्रीय रिजर्व बल का चार महानिदेशक पदक मिल चुका है, इसे बेहद प्रतिष्ठित इनाम माना जाता है। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से भी उन्हें कई पुरस्कार मिल चुके हैं। समय-समय पर इनाम और शासन स्तर से उनके जज्बे को सराहना मिली है।

अभी तक सात लोकसेवकों को किया गिरफ्तार

कई वर्षों तक नक्सल क्षेत्र में सेवा देने के बाद शासन स्तर से निरीक्षक शरद सिंह को एंटी करप्शन ब्यूरो में कार्य करने का अवसर दिया गया है 20 जनवरी 2020 से वे एंटी करप्शन ब्यूरो अंबिकापुर यूनिट में पदस्थ किए गए हैं यहां पदस्थापन के बाद से भ्रष्टाचार के मामले में सात लोक सेवकों की गिरफ्तारी करने वाली टीम का भी हिस्सा रहे रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार हुए अधिकारियों में विकास खंड शिक्षा अधिकारी और तहसीलदार भी शामिल है। कई वर्षों तक नक्सलियों के खिलाफ लोहा लेने वाले शरद सिंह भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं।

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