नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि कोरोना महामारी के चलते संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा देने से वंचित रह गए कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठने का एक अतिरिक्त मौका देने के फैसले का व्यापक प्रभाव पड़ेगा। यह सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली के समग्र कामकाज और आवश्यक एक समान अवसर के लिए भी हानिकारक होगा।

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर मांग की गई है कि जो अभ्यर्थी कोरोना महामारी के चलते यूपीएससी की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2020 नहीं दे पाए थे और जिनका परीक्षा में बैठने का आखिरी मौका खत्म हो चुका है उन्हें एक और मौका दिया जाए।

शीर्ष अदालत में दायर हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा है कि कुछ अभ्यर्थियों को अतिरिक्त मौका या आयु में रियायत देना परीक्षा में बैठने वाले दूसरे अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव होगा। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को पिछली सुनवाई के दौरान कहा था कि वह अभ्यर्थियों को अतिरिक्त मौका देने के पक्ष में नहीं है। इस पर अदालत ने सरकार से सोमवार तक हलफनामा दायर करने को कहा था। इसके बाद कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के अवर सचिव द्वारा शीर्ष अदालत में यह हलफनामा दायर किया गया।

जस्टिस एएम खानविल्कर, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ में इस मामले की सुनवाई होनी थी। लेकिन जस्टिस खानविल्कर की पीठ ने 28 जनवरी तक सुनवाई टाल दी।

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