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केंद्र सरकार का बड़ा कदम, पुलिस बलों के आधुनिकीकरण की योजना को सैद्धांतिक मंजूरी के लिए भेजा प्रस्ताव

Published: Wed, 05 Aug 2026 09:51 PM (IST)

केंद्र सरकार ने पुलिस बलों के आधुनिकीकरण की व्यापक योजना वित्त मंत्रालय को सैद्धांतिक मंजूरी के लिए भेजी है।

पुलिस व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम (प्रतीकात्मक फोटो)

पुलिस व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम (प्रतीकात्मक फोटो)

HighLights

  1. पुलिस आधुनिकीकरण योजना वित्त मंत्रालय को भेजी गई।

  2. थानों में सीसीटीवी लगाने की समयसीमा 2027 तक बढ़ी।

  3. सुप्रीम कोर्ट मानवाधिकारों की सुरक्षा पर सख्त।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के हर कोने में नागरिक अधिकारों की सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम उठाया है।

थानों में सुरक्षा और मानवाधिकारों की रक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने जानकारी दी है कि देश भर के पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए एक व्यापक योजना का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग को सैद्धांतिक मंजूरी के लिए भेज दिया गया है।

अडिशनल सॉलिसिटर जनरल राजकुमार भास्कर ठाकरे ने जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ को अवगत कराया कि यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव 8 जुलाई को ही भेजा जा चुका है और फिलहाल इस पर विचार किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई स्वतः संज्ञान लेते हुए कर रहा था, जो मुख्य रूप से थानों में क्रियाशील सीसीटीवी कैमरों की कमी और उनकी स्थिति से जुड़ा हुआ है।

थानों में सीसीटीवी के लिए बढ़ी समयसीमा

सुनवाई के दौरान कोर्ट को यह भी बताया गया कि पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए मौजूदा वित्त पोषण योजना को अब बढ़ाकर 31 मार्च 2027 तक कर दिया गया है।

कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस व्यापक योजना का विवरण अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है और दो सप्ताह के भीतर अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने का समय देते हुए अगली सुनवाई एक सितंबर के लिए तय की है।

मानवाधिकारों की रक्षा व पारदर्शिता के लिए कोर्ट की सख्त पहल

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2018 में मानवाधिकारों के हनन को रोकने के लिए देश के सभी थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का ऐतिहासिक आदेश दिया था।

इसके बाद दिसंबर 2020 में सीबीआइ, ईडी और एनआइए जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों के दफ्तरों में भी नाइट विजन, ऑडियो-वीडियो रिकार्डिंग और कम से कम एक साल तक का डाटा स्टोर करने की क्षमता वाले कैमरे लगाने को अनिवार्य कर दिया गया था। कोर्ट की इस निरंतर निगरानी से अब पुलिस व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव और पारदर्शिता की उम्मीद जग रही है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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