6 साल से जेल में बंद उमर खालिद पर IIIT-हैदराबाद में बनी डॉक्यूमेंट्री, सेंसर बोर्ड ने स्क्रीनिंग पर जताई आपत्ति
सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने IIIT-हैदराबाद में उमर खालिद पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग पर आपत्ति जताई, इसे सिनेमैटोग्राफ एक्ट का उल्लंघन बताया।

उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग पर जताई आपत्ति (फाइल फोटो)
HighLights
CBFC ने उमर खालिद डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग पर आपत्ति जताई।
IIIT-हैदराबाद ने स्क्रीनिंग आयोजित करने से इनकार किया।
छात्रों ने डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग रद करने का फैसला लिया।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी हैदराबाद (IIIT-H) में आज शुक्रवार को जेल में बंद एक्टिविस्ट उमर खालिद पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग होनी थी, लेकिन सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने स्क्रीनिंग से पहले ही इस पर आपत्ति जताई।
बोर्ड ने स्क्रीनिंग से एक दिन पहले ही साफ तौर पर कहा कि बिना सर्टिफिकेट वाली फिल्म की पब्लिक स्क्रीनिंग सिनेमैटोग्राफ एक्ट का उल्लंघन है, जब तक कि इसके लिए कोई खास छूट न ली गई हो।
CBFC ने रोकी उमर खालिद पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग
सीबीएफसी ने IIIT- हैदराबाद को टैग करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'CBFC से सर्टिफाई न हुई डॉक्यूमेंट्री फिल्म की पब्लिक स्क्रीनिंग करना सिनेमैटोग्राफ एक्ट का उल्लंघन है, जब तक कि इस एक्ट के तहत कोई खास छूट न ली गई हो। @iiit_hyderabad के अधिकारी जरूरी कार्रवाई के लिए इस पर ध्यान दे सकते हैं।'
फिल्ममेकर ललित वचानी की डायरेक्ट की गई डॉक्यूमेंट्री 'प्रिजनर नंबर 626710 इज प्रेजेंट' की स्क्रीनिंग आज शुक्रवार रात 8 बजे इंस्टीट्यूट के KRB ऑडिटोरियम में छात्रों के एक ग्रुप द्वारा की जानी थी। सूत्रों के मुताबिक, छात्रों ने अब स्क्रीनिंग रद करने का फैसला किया है।

IIIT-हैदराबाद ने स्क्रीनिंग की बात से किया इनकार
अपने बयान में इंस्टीट्यूट ने कहा, 'IIIT-H साफ तौर पर स्पष्ट करता है कि न तो इंस्टीट्यूट और न ही उसके किसी मान्यता प्राप्त स्टूडेंट क्लब, सेल या संगठन ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन से सर्टिफाइड न होने वाली किसी फिल्म की स्क्रीनिंग का आयोजन या मेजबानी की है।'
इंस्टीट्यूट ने आगे कहा, 'IIIT हैदराबाद में कैंपस में होने वाले ऑफिशियल इवेंट्स और गतिविधियों के लिए तय प्रक्रियाएं हैं और इंस्टीट्यूट या उसके मान्यता प्राप्त स्टूडेंट ग्रुप्स से किसी अनधिकृत या असंबंधित गतिविधि को जोड़ने वाला कोई भी दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है।'
इंस्टीट्यूट ने आगे कहा, 'उसका स्टूडेंट समुदाय बड़ा और विविध है, और छात्र व फैकल्टी अपनी व्यक्तिगत हैसियत से लोगों से मिल या बातचीत कर सकते हैं।'
IIIT-H की तरफ से आगे कहा गया, 'ऐसी व्यक्तिगत बातचीत या मुलाकातों को, जहां भी वे होती हैं, इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित इवेंट्स नहीं माना जाना चाहिए और न ही वे इंस्टीट्यूट के विचारों या गतिविधियों का प्रतिनिधित्व करती हैं।'
ABVP ने की थी स्क्रीनिंग रद करने की मांग
बेंगलुरु के नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) में इसी डॉक्यूमेंट्री की प्रस्तावित स्क्रीनिंग को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने विरोध किया था।
NLSIU की 'लॉ एंड सोसाइटी कमेटी' (जो छात्रों द्वारा चलाई जाती है) ने 'पॉलिटिकल प्रिजनर्स डे' और उमर खालिद की जेल की सजा के छह साल पूरे होने के मौके पर एक स्क्रीनिंग का आयोजन किया था।
ABVP ने इस स्क्रीनिंग को रद करने की मांग की थी। उनका आरोप था कि इसकी इजाजत देने का मतलब कैंपस का इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार के लिए करना होगा।
इसके बाद NLSIU छात्र कमेटी ने 'लॉजिस्टिकल और सुरक्षा कारणों' का हवाला देते हुए कार्यक्रम को टाल दिया। साथ ही, उन्होंने कहा कि वे किसी दबाव में आकर पीछे नहीं हट रहे हैं और स्क्रीनिंग ट्राइमेस्टर के दौरान बाद में की जाएगी
छह साल से जेल में बंद उमर खालिद
'प्रिजनर नंबर 626710 इज प्रेजेंट' फिल्म उमर खालिद पर केंद्रित है। खालिद जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के पूर्व रिसर्च स्कॉलर है, जिसे सितंबर 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के पीछे की बड़ी साजिश रचने के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था।
इस मामले में खालिद पर 'अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट' (UAPA) और अन्य धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं और गिरफ्तारी के बाद से ही वो हिरासत में है।
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