CEC ज्ञानेश कुमार ने दोनों चुनाव आयुक्तों के साथ बैठकर मतभेद की अटकलों को दिया विराम, लिए 7 बड़े फैसले
चुनाव आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों के साथ बैठक कर एसआईआर प्रक्रिया को लेकर मतभेद की अटकलों को विराम दिया।

चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया पर मतभेद की अटकलें समाप्त कीं (फोटो-ANI)

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नीलू रंजन, नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विनीत जोशी ने पूर्ण चुनाव आयोग की बैठक कर तीनों के बीच एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर मतभेद की अटकलों को विराम दे दिया है।
तीन दिन से चल रहे राजनीतिक घमासान के बीच शनिवार को तीनों चुनाव आयुक्त तीन बजे आयोग में एक साथ बैठे और एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर चल गलतफहमियों को दूर करने के साथ ही आम लोगों की दिक्कतों को दूर करने के लिए भी अहम फैसले लिए।
तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से जारी प्रेस विज्ञप्ति में एसआईआर को लेकर लिए गए फैसलों, नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-छह में संशोधन और दो चुनाव आयुक्तों द्वारा कैबिनेट सचिव को लिखे गए पत्र के बारे में फैलाए जा रहे भ्रम को दूर किया गया।
विवाद खड़ा होने के बाद पहली बार हुई पूर्ण चुनाव आयोग की बैठक में कुल नौ फैसले लिए गए, जिनमें पांच सीधे तौर पर मौजूदा चल रही एसआईआर की प्रक्रिया में मतदाताओं को हो रही परेशानियों को दूर करने से संबंधित हैं। चार फैसले चुनाव आयोग के अंदरूनी कामकाज और उनमें ज्यादा पारदर्शिता लाने से संबंधित हैं। इनके अलावा तीन बिंदुओं पर फैलाए गए भ्रम को दूर करने से संबंधित हैं।
तीनों चुनाव आयुक्तों ने साफ किया कि 24 जून 2025 को बिहार में एसआईआर कराने से लेकर बाद में पश्चिम बंगाल समेत अन्य 30 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर कराने का फैसला सर्वसम्मति ले लिया गया था। बाद में 25 मई 2027 को सुप्रीम कोर्ट ने इन फैसलों पर मुहर लगाई थी। तीनों चुनाव आयुक्तों के अनुसार एसआईआर के बाद मतदाताओं की अंतिम संख्या 12 राज्यों मे चालू प्रक्रिया को पूरी होने के बाद जारी की जाएगी।
तीनों चुनाव आयुक्तों के अनुसार कैबिनेट सचिव को दो चुनाव आयुक्तों द्वारा लिखा गया पत्र आयोग के आईटी डिविजिन या नीतिगत मामलों से जुड़ा नहीं था, जैसा की फैलाया जा रहा है। बल्कि प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी से संबंधित था। दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति के बाद उक्त अधिकारी के फैसले को लागू नहीं किया गया और साथ ही आईटी डिविजन पर जिला निर्वाचन अधिकारी के अधिकार को कभी वापस नहीं लिया गया।
तीनों चुनाव आयुक्तों ने गोवा के 97 मतदाताओं के फॉर्म-छह के सूची में अपलोड होने पर भी चर्चा की और बताया कि गोवा के सीटीओ को इस संबंध में निर्देश दिया जा चुका है, जिसमें मतदाताओं के घर-घर जाकर फॉर्म लेने और सूची में शामिल करना शामिल है। इनमें से 81 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल किये जा चुके हैं।
नए वोटरों के फॉर्म-छह पर भी स्थिति साफ
नए वोटरों के लिए फॉर्म छह के साथ घोषणापत्र देने के कारण बड़ी संख्या में युवा मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल नहीं होने की आशंका को भी तीनों चुनाव आयुक्तों ने खारिज कर दिया। उनके अनुसार यह व्यवस्था अस्थायी है, जो सिर्फ एसआईआर के लिए की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसे सही ठहराया था।
एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बनने वाले नए मतदाताओं को यह घोषणा पत्र नहीं देना होगा। घोषणापत्र में नए मतदाताओं को अपने माता-पिता का नाम पुराने एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में शामिल होने की जानकारी देनी होती थी।
अन्य अहम फैसले
-तर्कसंगत विसंगतियों के कारण नोटिस दिए गए मतदाताओं को ईआरओ और एइआरओ से सुनवाई के लिए नहीं तलब किया जाएगा।
- इसकी जगह बीएलओ उनके घर जाकर दस्तावेज लेगा और उन्हें ईसीआईनेट पर अपलोड करेगा।
- केवल विशेष मामलों में उन्हें आनलाइन सुनवाई के लिए तलब किया जाएगा, जिसमें उनकी जगह उनका करीबी रिश्तेदार भी हिस्सा ले सकता है।
-रात्रि विश्राम स्थलों, मजदूरों, गरीबों, बेघरों के लिए जिला चुनाव अधिकारी पर्याप्त संख्या में हेल्प डेस्क और विशेष कैंप लगाने की व्यवस्था करेगा।
-ईसीआईनेट के नियम और कानून सम्मत कामकाज की निगरानी के लिए सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमीश्नर की अध्यक्षता में कमेटी बनेगी, जिसमें आईआईटी या आईआईआईटी के स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होंगे।
-दिल्ली के सीईओ के 30 अक्टूबर तक शिकायतों की सुनवाई करने और 30 नवंबर तक फैसला लेने का समय दिया गया है। महाराष्ट्र के लिए यह समय सीमा 12 अक्टूबर और 10 नवंबर होगी।
-आयोग की बैठकों का एजेंडा पूर्व में भेजा जाएगा और बैठकों के मिनट्स भी तैयार किये जाएंगे।
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