जागरण संवाददाता, कोलकाता। सैकड़ों करोड़ रुपये के सारधा चिटफंड घोटाले के मुख्य सरगना सुदीप्त सेन, देवयानी मुखर्जी व कुणाल घोष समेत छह अभियुक्तों अलीपुर कोर्ट ने सोमवार को सात दिनों की सीबीआइ हिरासत में भेज दिया। इसी के साथ अब सीबीआइ की जांच व गिरफ्तारी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

सीबीआइ ने घोटाले को लेकर कुल 46 मामला दर्ज करने के बाद पूरी जांच अपने हाथ में लेने के करीब एक माह बाद अभियुक्त सुदीप्त सेन, देवयानी मुखर्जी, अरविंद सिंह चौहान, मनोज नागेल, तृणमूल से निलंबित राज्यसभा सांसद कुणाल घोष व सोमनाथ दत्त को अपनी हिरासत में लिया है। मामले में गिरफ्तार 6 आरोपियों को अलीपुर कोर्ट ने 23 जून तक सीबीआइ हिरासत में रखने का निर्देश दिया है।

सीबीआइ की तरफ से पिछले सप्ताह अलीपुर कोर्ट में गिरफ्तार आरोपियों को पेश करने के लिए प्रोटेक्शन वारंट जारी करने की अर्जी दी गई थी, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया था। उसी अनुसार, आज सभी अभियुक्तों को बारी-बारी से कोर्ट में हाजिर किया गया। इसके बाद सीबीआइ की ओर से कोर्ट में सभी अभियुक्तों को 26 जून तक रिमांड पर लेने की अर्जी दी गई। दोनों पक्षों के सवाल-जवाब के दौरान सीबीआइ के वकील की तरफ से कहा गया कि सीबीआइ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सारधा के रुपये कहां गए, साथ ही इस घोटाले से लाभान्वित कौन हुए हैं और गंभीर षड्यंत्रकारी का पता लगाना है। इसके लिए सभी आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करना जरूरी है। इनके पास से जो तथ्य सामने आएंगे उसी के आधार पर जांच प्रक्रिया आगे बढ़ेगी अन्यथा इसे पूरा करना संभव नहीं हो पाएगा। इसके अलावा जगह-जगह तलाशी अभियान चलाना होगा और विभिन्न संस्थाओं द्वारा किए गए जांच में जिन नेता मंत्रियों का नाम सामने आए हैं उन्हें बुलाकर पूछताछ करनी होगी। इन सारी प्रक्रिया को पूरी करने के लिए आरोपियों को 10 दिनों के लिए हिरासत में लेना जरूरी है। मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के सवाल जवाब सुनने के बाद 7 दिनों तक सीबीआइ हिरासत में रखने का निर्देश दिया।

गौरतलब है कि सीबीआइ ने कोर्ट के समक्ष पहली बार आरोपियों को अपनी हिरासत में लेने के लिए आवेदन किया है। कोर्ट के इस निर्देश के बाद सारधा मामले की जांच अब पूरी तरह से केंद्रीय संस्था के हाथों में चली गई।

आरोपियों ने जमानत के लिए नहीं किया आवेदन:

कोर्ट में पेशी के दौरान सारधा कांड में गिरफ्तार छह आरोपियों में से किसी ने भी जमानत के लिए आवेदन नहीं किया। सबके वकील की तरफ से यही कहा गया कि आरोपी जमानत नहीं चाहते बल्कि वे जांच में सीबीआइ की सहायता करना चाहते हैं, जबकि पेशी के लिए कोर्ट में जाते वक्त सांसद कुणाल घोष ने कहा कि उन्हें बहुत कुछ कहना है लेकिन वे सारी बातें सीबीआइ से ही बोलेंगे।

उन्होंने कहा कि वे सीबीआइ जांच से बेहद खुश हैं वे पहले से चाहते थे कि मामले की सीबीआइ ही जांच करे। अब सीबीआइ जांच शुरू हुई है। वह पूरी मदद करना चाहते हैं, इसीलिए उन्हें जमानत नहीं चाहिए।

पढ़ें: सारधा मामले में सीबीआइ ने दर्ज किए 46 मामले

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