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नए सीएपीएफ कानून के प्रविधानों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, कैडर अधिकारियों ने दायर की याचिका

Published: Sat, 01 Aug 2026 10:27 PM (IST)Updated: Sat, 01 Aug 2026 10:30 PM (IST)

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के अधिकारियों ने हाल ही में लागू सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) कानून के कुछ प्रविधानों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

सुप्रीम कोर्ट।

सुप्रीम कोर्ट।

HighLights

  1. सीएपीएफ अधिकारियों ने नए कानून के प्रावधानों को चुनौती दी।

  2. अधिकारियों का दावा, कानून से करियर प्रगति सीमित होगी।

  3. सुप्रीम कोर्ट अगस्त के पहले हफ्ते में सुनवाई करेगा।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के अधिकारियों के एक समूह ने हाल में लागू किए गए सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) कानून के कुछ प्रविधानों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ताओं में शौर्य पदक विजेता और कुछ महिला अधिकारी भी शामिल हैं।

सूत्रों ने शनिवार को बताया कि इन अधिकारियों का कहना है कि यह कानून उनके करियर में प्रगति के अवसरों को सीमित करेगा। अदालत के दस्तावेज के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई अगस्त के पहले हफ्ते में तय की है।

अधिकारियों ने दी जानकारी

अधिकारियों और उनके कानूनी प्रतिनिधियों ने बताया कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) सहित पांच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के लगभग तीन हजार संवर्ग (कैडर) अधिकारियों ने याचिकाएं दाखिल की हैं।

ये याचिकाएं संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई हैं, जो नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार देता है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्हें मजबूर होकर शीर्ष अदालत का रुख करना पड़ा, क्योंकि उन्हें लगता है कि नए कानून से उन्हें न्याय नहीं मिला और मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का अनुपालन नहीं किया गया।

उन्हें लगता है कि नया कानून सीएपीएफ के कैडर अधिकारियों की पदोन्नति में लंबे समय से चली आ रही रुकावट की समस्या का समाधान नहीं करेगा। अधिकारियों ने अदालत से सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 की धारा तीन और चार को संविधान के विरुद्ध (अल्ट्रा वायर्स) घोषित करने तथा केंद्र सरकार को मई 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पूरी तरह लागू करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

उच्चतम न्यायालय ने 23 मई, 2025 को अपने फैसले में कहा था कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में महानिरीक्षक (आइजी) स्तर तक भारतीय पुलिस सेवा (आइपीएस) अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को क्रमिक रूप से कम किया जाए ताकि कैडर अधिकारियों को अधिक अवसर मिल सकें जिनकी पदोन्नति में देरी से इन बलों का मनोबल प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया था केंद्र का याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका को भी खारिज कर दिया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने संसद में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक पेश किया, जिसे अप्रैल में कानून के रूप में अधिसूचित किया गया। इस कानून की धारा तीन केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में भर्ती और सेवा शर्तों के विनियमन से संबंधित है, जबकि धारा चार केंद्र सरकार को अनुसूचियों में संशोधन का अधिकार देती है।

सूत्रों के अनुसार इन याचिकाकर्ता अधिकारियों ने अनुरोध किया है कि सीएपीएफ में अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) स्तर के पदों को केवल आइपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरने के बजाय, निर्धारित पात्रता के आधार पर संबंधित बलों के संवर्ग (कैडर) अधिकारियों के लिए भी अवसर उपलब्ध कराया जाए।

सरकार का कहना है कि इस अधिनियम का उद्देश्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के सभी कर्मियों की सेवा शर्तों के लिए समान कानूनी ढांचा तैयार करना है, जिससे कैडर अधिकारियों और आइपीएस से प्रतिनियुक्ति पर आने वाले अधिकारियों के लिए अलग-अलग सेवा नियमों की मौजूदा व्यवस्था समाप्त हो सके।