नितिन प्रधान, नई दिल्ली। केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों के लिए अब देरी से चल रही परियोजनाओं के मामले में हीलाहवाली बरतना आसान नहीं होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परियोजनाओं में होने वाली देरी को लेकर बरती गई सख्ती के चलते बाबू अब ऐसे मामलों के लिए आवश्यक मंजूरी के कामों को लटका नहीं पाएंगे।

सभी मंत्रालयों और विभागों को स्पष्ट तौर पर कह दिया गया है कि जिस परियोजनाओं में देरी की संभावना हो उसका आकलन कर उसकी अंतिम तारीख से पहले ही कर लें। साथ ही ऐसे सभी प्रस्तावों को अंतिम तारीख से पहले ही मंत्रिमंडल की मंजूरी के निर्देश भी दिए गए हैैं।

केंद्रीय परियोजनाओं के पूरा होने में देरी की अन्य वजहों के साथ साथ एक बड़ा कारण मंत्रालयों और विभागों के अधिकारियों की लापरवाही भी रही है। सूत्र बताते हैैं कि प्रधानमंत्री कार्यालय की नजर में ऐसे कई मामले आए हैैं जिनमें परियोजना समाप्त होने की अंतिम तारीख बीत जाने के काफी समय तक इस बात की चर्चा तक मंत्रालय में नहीं हुई कि परियोजना के लिए नया लक्ष्य क्या रखा जाए।

ऐसे तमाम मामलों के आकलन के बाद कैबिनेट सचिवालय ने बीते महीने सभी मंत्रालयों और विभागों को निर्देश जारी करके कहा है कि परियोजना समाप्त होने की तारीख बीत जाने के बाद कैबिनेट से परियोजना खत्म होने की नई तारीख की मंजूरी अब नहीं ली जा सकेगी।

बुनियादी क्षेत्र की परियोजनाओं की समीक्षा बैठकों में प्रधानमंत्री का हमेशा परियोजनाओं को समय से पूरा करने पर जोर रहा है। इसके लिए जिस स्तर पर भी प्रक्रियागत अथवा फैसले लेने में देरी होती है, वह उसे दूर करने की सलाह देते रहे हैैं। किसी परियोजना में देरी के लिए तारीख बीत जाने के बाद भी उसके लिए नया लक्ष्य तय करने के प्रस्ताव तैयार करने में देरी को परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ाने में बाधा माना जा रहा है।

यही वजह है कि कैबिनेट सचिवालय से गत 12 फरवरी को जारी सर्कुलर में स्पष्ट कहा गया है कि समय विस्तार के प्रस्ताव भेजने में देरी अक्सर परियोजना के संबंध में अनिश्चितता का माहौल तैयार करती है और सरकार के फैसला लेने की प्रक्रिया को धीमा करती है।

इसे ध्यान में रखते हुए कैबिनेट सचिवालय ने सभी मंत्रालयों और विभागों को निर्देश दिया है कि किसी भी परियोजना के लिए समय विस्तार का प्रस्ताव उसकी मौजूदा अंतिम तारीख समाप्त होने से काफी पहले ही कैबिनेट को भेजा जाए। सर्कुलर में इस नियम को तत्काल प्रभाव से अमल में लाने का निर्देश दिया गया है।

चूंकि प्रत्येक परियोजना को पूरी करने का समय समाप्त होने के बाद उसके लिए तय किए गए नए लक्ष्य या नई तारीख को केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी लेना आवश्यक होता है। ऐसे में किसी भी तरह की देरी होने पर फैसले लेने की पूरी प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में आ जाती है।

Edited By: Rajesh Kumar