नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि पत्रकारों और गैर पत्रकारों के लिए मजीठिया वेजबोर्ड की लंबित सिफारिशों को लागू करने का फैसला केंद्रीय कैबिनेट कर सकती है। न्यायाधीश दलवीर भडारी तथा दीपक वर्मा की पीठ ने हालांकि साथ ही स्पष्ट किया कि सरकार का फैसला विभिन्न मीडिया घरानों की ओर से दाखिल मामलों के अंतिम नतीजे पर निर्भर करेगा। इन मीडिया घरानों ने सरकार को वेजबोर्ड की सिफारिशों को लागू करने से रोके जाने की माग की है।

शीर्ष अदालत को जब यह बताया गया कि मामले के सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण कैबिनेट कोई फैसला नहीं ले पा रही है तो अदालत ने कहा कि कैबिनेट विषय पर विचार कर सकती है। आपको फैसला लेने से कोई रोक नहीं रहा है। शीर्ष अदालत ने एम्प्लाइज यूनियन का पक्ष रखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंसाल्वेज द्वारा अपनी बात रखे जाने के बाद यह टिप्पणी की। शीर्ष अदालत ने 18 जुलाई को सरकार को वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू करने पर कोई फैसला लेने से दो सप्ताह तक रूकने को कहा था।

इससे पूर्व, मई में सुप्रीम कोर्ट ने मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को चुनौती देने वाली याचिका पर सरकार को नोटिस जारी किया था। उस समय अदालत ने कोई आदेश निर्देश नहीं दिया था। सबसे पहले आनंद बाजार पत्रिका प्राइवेट लिमिटेड ने बोर्ड की सिफारिशों को चुनौती दी थी। लेकिन उसके बाद कई अन्य मीडिया संगठनों ने वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू करने का विरोध करते हुए याचिकाएं दाखिल की जिनमें टाइम्स आफ इंडिया की प्रकाशक कंपनी बैनेट एंड कोलमैन कंपनी लिमिटेड, संवाद समिति यूनाइटेड न्यूज आफ इंडिया भी शामिल थे।

प्रमुख अंग्रेजी और बंगाली दैनिकों की प्रकाशक कंपनी आनंद बाजार पत्रिका प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दाखिल याचिका में माग की गई थी कि वेज बोर्ड और पिछले वर्ष दिसंबर में सरकार को सौंपी गई उसकी सिफारिशों को मनमाना तथा गैर कानूनी घोषित किया जाए। याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत से वेज बोर्ड के गठन को अधिकार क्षेत्र से परे घोषित किए जाने और केंद्र सरकार तथा अन्यों को इसकी सिफारिशों को लागू करने से रोके जाने की अपील की थी।

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