बीएस-6 वाहनों के लिए पीयूसीसी वैधता तीन साल करने का प्रस्ताव, पाल्यूशन सेंटर के चक्कर काटने से मिल सकती है राहत
सरकार ने 6 साल तक पुराने BS-6 प्राइवेट वाहनों के लिए PUC सर्टिफिकेट की वैधता 1 साल से बढ़ाकर 3 साल करने का प्रस्ताव दिया है।

HighLights
BS-6 प्राइवेट वाहनों के लिए PUC वैधता 3 साल तक बढ़ाई गई।
वाहन मालिकों को प्रदूषण जांच केंद्रों के बार-बार चक्करों से राहत।
सड़क परिवहन मंत्रालय ने BS-6 सहित अन्य वाहनों के लिए नियम बदले।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के लाखों वाहन मालिकों को सरकार बड़ी राहत देने वाली है। सरकार ने छह साल तक पुरानी बीएस-6 मानकों वाले प्राइवेट वाहनों के लिए 'पाल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट' (पीयूसीसी) की वैधता को मौजूदा एक साल से बढ़ाकर तीन साल करने का प्रस्ताव दिया है। इस नए नियम के लागू होने से वाहन चालकों को हर साल पाल्यूशन सेंटर के चक्कर काटने से राहत मिलेगी।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मसौदा अधिसूचना में कहा है कि छह साल तक पुराने बीएस-6 कमर्शियल वाहनों के लिए पीयूसीसी की वैधता दो साल करने का प्रस्ताव है।
छह से 10 साल पुराने बीएस-6 वाहनों को अपना पीयूसीसी सर्टिफिकेट हर साल रिन्यू कराना होगा, जबकि 10 साल से अधिक पुराने बीएस-6 वाहनों को हर छह महीने में अपना पीयूसीसी सर्टिफ़िकेट रिन्यू कराना होगा।
मसौदा अधिसूचना के अनुसार, बीएस-चार वाले सभी वाहनों को अपना पीयूसीसी एक साल के बजाय हर छह महीने में रिन्यू करवाना होगा, जबकि बीएस-एक, बीएस-2 और बीएस-3 वाले वाहनों को अपना पीयूसीसी हर तीन महीने में रिन्यू करवाना होगा।
बीएस या भारत स्टेज, भारत के वाहनों से होने वाले उत्सर्जन के उन मानकों को कहते हैं जो कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन और पार्टिकुलेट मैटर जैसे प्रदूषकों की सीमा तय करते हैं। ये मानक यूरोपीय उत्सर्जन नियमों के अनुरूप हैं और इन्हें अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को धीरे-धीरे हटाने के लिए लागू किया गया है।
बीएस-चार 2017 से 2020 तक लागू था। बीएस-छह अप्रैल 2020 से लागू है। भारत ने प्रदूषण पर तेजी से काबू पाने के लिए बीएस-पांच को छोड़कर सीधे बीएस-छह को अपनाया। बीएस-छह वाहन बहुत कम प्रदूषक तत्व छोड़ती हैं और इनके लिए कम सल्फर वाले बीएस-छह ईंधन की जरूरत होती है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)