सूरत। राजस्थान के अलवर निवासी मोइनुद्दीन खान (43) मुंबई के अस्पताल में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा था, खान को दिल का ट्रांसप्लांट करना था और इन्हें अपना दिल दिया 17 वर्षीय ब्रेनडेड युवक ने।

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खान उन चार लोगों में से थे जिन्हें 17 वर्षीय दिशांक जरीवाला के परिवार ने अपने ब्रेन डेड बेटे के अंगों को दान देने का निर्णया किया। दिशांक के दो किडनी वीरग्राम के आठ वर्षीय काव्य भट्ट और सूरत के 20 वर्षीय जिग्नेश डांडूकिया के शरीर में ट्रांसप्लांट किए गए। जबकि लिवर को भरूच निवासी 32 वर्षीय उमेश गुर्जर को मिला। दिशांक कि आंखों को भी दान में दे दिया गया ताकि उसकी आंखों से दो लोगों को रोशनी मिल सके।

23 अप्रैल को गौरव पथ पर इस्कॉन मॉल के पास एक सड़क दुर्घटना में बारहवीं का छात्र दिशांक गंभीर रूप से जख्मी हो गया इसके बाद उसे ब्रेन-डेड घोषित कर दिया गया। दिशांक अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। दिशांक के पिता कमल जरीवाला जो जरी का व्यापार करते हैं व परिवार के अन्य सदस्यों ने उसके अंगों को दान करने का निर्णय लिया।

उसके दिल को दान करने के लिए उन्होंने मुंबई के फोर्टिस हॉस्पिटल व अनय अंगों के लिए अहमदाबाद के इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिजीज एंड रिसर्च सेंटर में कंटैक्ट किया।

दिशांक के दिल को सूरत से मुंबई 85 मिनट में लाया गया। इसके लिए सूरत पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर और चार्टर्ड विमान का इंतजाम किया।

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24 अप्रैल को सुबह 10.33 बजे मुंबई हॉस्पिटल के चिकित्सकों की एक टीम सूरत से दिशांक के दिल को मुंबई हॉस्पिटल के ऑपरेशन थिएटर लेकर सुबह के 11.48 बजे पहुंची। दोपहर दो बजे खान के शरीर में दिशांक के दिल को ट्रांसप्लांट किया गया।

सूरत में ऐसा चौथा मामला सामने आया है। मुंबई में अब तक 14 दिलों को ट्रांसप्लांट किया गया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया को दिशांक के पिता ने बताया, ‘मैंने अंगदान के बारे में सुना था। यदि मेरे बेटे के अंगों से दूसरे लोगों को जीवनदान मिल सकता है तो मैंने सोचा कि दान कर देना उचित निर्णय है।‘

Posted By: Monika minal

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