नई दिल्ली। विश्व की एकमात्र सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्माोस की काट ढूंढने में दुनिया को कम से कम 20 साल लग जाएंगे। यह दावा किया है इस मिसाइल के जनक शिवथानु पिल्लै ने। भारत के सैन्य कौशल की प्रतीक इस मिसाइल को नौसेना और थलसेना को मुहैया कराया जा चुका है। भारतीय वायुसेना के लिए इसका संस्करण भी कुछ ही वर्षो में तैयार हो जाएगा।

ब्रह्माोस एरोस्पेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक शिवथानु पिल्लै ने भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित इस मिसाइल के बराबरी की क्षमता वाली मिसाइल अभी विकसित की जानी है। पिल्लै रक्षा एवं अनुसंधान संगठन के शोध एवं विकास के मुख्य नियंत्रक भी हैं। उन्होंने इस मिसाइल तकनीक को भारत को सुरक्षा प्रदान करने वाले व इसके भविष्य को महफूज रखने वाले दस प्रमुख प्रौद्योगिकियों में एक बताया है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे कलाम के साथ मिलकर लिखी एक नई पुस्तक में इसके बारे में बहुत सारी बातें कही हैं। 'थॉट्स फॉर चेंज : वी कैन डू इट' नाम की इस पुस्तक को इन दोनों वैज्ञानिकों ने भारत के प्राचीन वैज्ञानिक विद्या को वापस प्राप्त करने को युवकों का आह्वान करने के लिए लिखा है।

पिल्लै ने एक साक्षात्कार में कहा कि हमें इस बात का गर्व है कि ब्रह्माोस वास्तव में दुनिया की एकमात्र सुपरसोनिक कू्रज मिसाइल है और यह भारत और रूस के सहयोग का प्रतीक है। इसमें भारत ने मार्गदर्शन, वैमानिकी से जुड़ी इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली तकनीक, सॉफ्टवेयर व उसके ढांचे के पुर्जे मुहैया कराए। भारत के डीआरडीओ और रूस के एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया द्वारा संयुक्त रूप से विकसित यह रडार से बच निकलने वाली मिसाइल है जो 290 किलोमीटर तक की दूरी 2.8 से 3 मैक की गति से तय कर सकती है। एक मैक का मतलब 1236 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार है। ब्रह्माोस का नामकरण भारतीय नदी ब्रह्मापुत्र और रूस की नदी मोस्कवा के नाम पर रखा गया है।

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