[प्रणव सिरोही] Book Review: एक व्यक्ति जो अकादमिक जगत से लेकर भारतीय विदेश सेवा में सक्रिय रहने के बाद दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की गणतांत्रिक व्यवस्था के दूसरे शीर्ष पायदान पर पूरे एक दशक तक विराजमान रहा हो तो नि:संदेह उसके पास कहने के लिए काफी कुछ होगा। पूर्व उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने अपनी आत्मकथा 'बाइ मैनी ए हैप्पी एक्सीडेंट'(BY MANY A HAPPY ACCIDENT) में अपने ऐसी ही अनुभवों को साझा किया है। इसमें उन्होंने करीब पांच दशक लंबे अपने सार्वजनिक जीवन का लेखाजोखा प्रस्तुत किया है।

बाइ मैनी ए हैप्पी एक्सीडेंट पुस्तक अपने शीर्षक को सार्थक करती है

जीवन तमाम असहज अनुभवों के साथ ही विभिन्न पड़ावों पर हुए सुखद संयोगों का ही एक समुच्चय होता है। लेखक ने अपने जीवन के जितने सुखद संयोगों से साक्षात्कार कराया है, उससे यह पुस्तक अपने शीर्षक को पूरी तरह सार्थक करती है।

पिता के दवाब में आकर प्रशासनिक सेवा में दांव अजमाया

अंसारी, जिनका पहला प्रेम अकादमिक जगत से जुड़ाव था, वह कैसे पिता के दबाव में आकर भारतीय प्रशासनिक सेवा में दांव आजमाने के लिए विवश होते हैं। फिर जब वह आइएएस बनने के लिए मसूरी रवाना होने की तैयारी करते हैं तो पता चलता है कि भारतीय विदेश सेवा यानी आइएफएस में संयोग से एक पद रिक्त है और अंसारी उस अवसर को लपक लेते हैं। यह निर्णय कैसे उनके जीवन को बदलने वाला साबित होता है। कैसे एक संयोग से ही उनकी भावी जीवन संगिनी उनके जीवन में दस्तक देती हैं।

काबुल में तैनाती के दौरान बम धमाके को मौत को दी मात, मनमोहन के एक काल ने बदली जिंदगी

इसी तरह काबुल में तैनाती के दौरान हुए बम धमाके में वह कैसे मौत को मात देने में कामयाब होते हैैं या विदेश सेवा से विदाई के बाद अपने पहले प्रेम यानी अकादमिक जगत में वापसी करने के बाद कैसे दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में बैठे-बैठे अचानक मनमोहन सिंह का एक फोन काल उनके जीवन में सबसे बड़ा बदलाव लाने वाला साबित होता है।

कूटनीति, संसदीय व्यवस्था और सार्वजनिक जीवन की मिलेगी जानकारी

अंसारी के जीवन वृत्त के साथ-साथ यह पुस्तक अध्ययन-अध्यापन, कूटनीति, संसदीय व्यवस्था और सार्वजनिक जीवन के अन्यान्य आयामों से भी परिचित कराती है। चूंकि अंसारी करीब चार दशक तक विदेश सेवा से जुड़े रहे तो उस अवधि के कालखंड का ही पुस्तक में अधिक विस्तार है। उनके इन्हीं अनुभवों से पता चलता है कि राजनय का कार्य कितना संवेदनशील और चुनौतियों भरा है और एक राजनयिक किस प्रकार सूचनाएं एकत्र कर अपने हितों की पूर्ति में प्रयासरत रहता है।

पुस्तक के पहले चार अध्याय विदेश सेवा और राजनय को समर्पित

आरंभिक चार अध्याय विदेश सेवा और राजनय को ही समर्पित हैं। वहीं उप-राष्ट्रपति कार्यकाल पर केवल दो अध्याय ही दिए गए हैं, जबकि डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के बाद भारतीय इतिहास में दो बार इस पद पर आसीन रहने वाले इकलौते शख्स रहे अंसारी से इस मोर्चे पर अधिक अनुभवों की अपेक्षा थी।

बराक ओबामा के दौरान तिरेंगे सलामी विवाद पर भी रखा पक्ष

इसमें उन्होंने 2015 के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि रहे अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यक्रम के दौरान तिरंगे को सलामी देने को लेकर हुए विवाद और उसी वर्ष जून में योग दिवस कार्यक्रम में अपनी अनुपस्थिति से उठ खड़े हुए बखेड़े पर अपना पक्ष भी रखा है। वहीं कुछ मुद्दों पर उनके विचार पूर्वाग्र्रह से प्रेरित भी लगते हैं।

सार्वजनिक जीवन में व्यापक सक्रियता के बावजूद अंसारी ने नितांत पारिवारिक व्यक्ति के रूप में अपनी पहचान को भी पर्याप्त रूप से अभिव्यक्त किया है। वह अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि और जड़ों से भी बड़ी आत्मीयता से परिचित कराते हुए अपने जीवन को दिशा देने वाली हस्तियों के साथ अपने सहज संबंधों को दर्शाने में सफल रहे हैं। प्रतीत होता है कि शायरी के प्रति उनका गहरा रुझान है।

पुस्तक की शुरुआत और अंत शायरी के साथ होता है

उनकी किताब का आरंभ और अंत शायरी के साथ ही होता है। कई विद्वानों को उन्होंने उद्धृत भी किया है। यहां तक कि जीवन में पहली दफा उन्हें जो लड़की पसंद आई, उसे बड़े संकोच के साथ लिखे पत्र में उन्होंने 'अरस्तू को उद्धृत किया था। हालांकि उनकी वह पहली प्रेम कहानी शुरू होने से पहले ही समाप्त हो गई थी। कुल मिलाकर, भाषा एवं शैली में सुगढ़ता, रोचक विषयवस्तु और अनूठा प्रवाह लिए हुए यह पुस्तक एक व्यक्ति के विभिन्न रूपों का रेखांकन करते हुए पाठकों का ज्ञानवर्धन करने में भी सफल होती है।

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पुस्तक: बाइ मैनी ए हैप्पी एक्सीडेंट

लेखक : एम. हामिद अंसारी

प्रकाशक : रूपा

मूल्य : 795 रुपये

Edited By: Pooja Singh