नई दिल्ली, जेएनएन। बांबे हाई कोर्ट की जस्टिस एसएस शिंदे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एल्गार परिषद मामले में आरोपित फादर स्टेन स्वामी की तारीफ में की गई मौखिक टिप्पणी वापस ले ली है। स्टेन स्वामी का हाल ही में गंभीर बीमारी से निधन हो गया था। उच्च न्यायालय के निर्देश पर स्टेन स्वामी को तलोजा जेल से इस निजी अस्पताल में दाखिल किया गया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) की ओर से हाई कोर्ट में पेश एडीशनल सालिसिटर जनरल अनिल सिंह ने सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की टिप्पणी पर आपत्ति जताई।

बांबे हाई कोर्ट ने सोमवार को स्टेन स्वामी को याद करते हुए कहा था कि कानूनी मामलों से इतर समाज के लिए किए गए कार्यो के लिए वह उनकी प्रशंसा करता है। ऐसी उम्मीद नहीं थी कि उनका निधन हो जाएगा। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सिंह ने कहा कि एनआइए के खिलाफ नकारात्मक छवि बनाई जा रही है और इससे जांचकर्ताओं के मनोबल पर असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि जस्टिस शिंदे ने खुली अदालत में यह टिप्पणी की और मीडिया में व्यापक रूप से इसकी रिपोर्टिग हुई।

उधर, स्वामी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मिहिर देसाई ने उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि वह अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करके एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में आरोपी स्टेन स्वामी की मृत्यु के मामले की मजिस्ट्रेट जांच की निगरानी करे। स्टेन स्वामी का पांच जुलाई को शहर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया था। देसाई ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 176 के अनुरूप उच्च न्यायालय से स्वामी के सहयोगी फादर फ्रेजर मासकैरनहास को स्वामी की मौत के मामले की जांच में शामिल होने की अनुमति देने का अनुरोध किया।

एनआइए की ओर से अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल अनिल सिंह ने कहा कि एजेंसी को फादर मासकैरनहास के जांच में भाग लेने पर कोई आपत्ति नहीं है इसलिए अदालत को एनएचआरसी दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए मजिस्ट्रेट को कोई निर्देश देने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह प्रक्रिया का हिस्सा है और उसका पालन किया जाएगा। उच्च न्यायालय में इस मामले की अगली सुनवाई चार अगस्त को होगी।

 

Edited By: Manish Pandey