मुंबई(पीटीआई)। बॉम्बे हाइकोर्ट ने कैदी विल्सन बेंजामिन कैस्टेलीनो की पैरोल अर्जी को खारिज कर दिया है। कैदी ने सर्जरी कराने के लिए इजाजत मांगी थी। कोर्ट ने कहा कि कैदी पहले भी फर्लो का उल्लंघन कर चुका है।इस वजह से उसे पैरोल की इजाजत नहीं दी जा सकती है। हालांकि मानवीय अाधार हाइकोर्ट के जजों ने उसे इलाज कराने के लिए कोल्हापुर के सीपीआर अस्पताल में भर्ती कराने के निर्देश दिए हैं।कोर्ट ने कहा कि अगर सीपीआर अस्पताल में आवश्यक सुविधा न हो तो उसे दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया जा सकता है।

क्या है मामला ?

विल्सन बेंजामिन कैस्टेलीनो को 1 नवंबर 2010 को 14 दिन के लिए फर्लो पर रिहा किया गया था। विल्सन को 4 दिसंबर 2010 को सरेंडर करना था। लेकिन वो फरार हो गया। हालांकि करीब दो साल के बाद पुलिस ने उसे दोबारा गिरफ्तार किया। फरारी के दौरान वो करीब 674 दिन जेल के बाहर रहा। कोल्हापुर जेल के डॉक्टर ने बताया कि विल्सन को नाक की परेशानी है और उसे इलाज के लिए भर्ती कराने की जरूरत है। लेकिन जेल प्रशासन ने विल्सन की पैरोल पर रिहाई का विरोध किया। जेल प्रशासन की तरफ से ये तर्क दिया गया है कि उसके पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए रिहाई नहीं होनी चाहिए। जजों ने कहा कि इसमें शक नहीं है कि विल्सन का पिछला रिकॉर्ड सही नहीं है। लेकिन उसे स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता है। जजों ने कहा कि कैदी के पिछले रिकॉर्ड को उसकी पैरोल की अर्जी खारिज की जाती है।लेकिन मानवीय आधार पर उसे इलाज की सुविधा देने से इनकार किया जा सकता है।

Edited By: Lalit Rai