यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 25, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Blood Cancer: बेरिएट्रिक सर्जरी से कम होता है ब्लड कैंसर का खतरा, रिसर्च में खुलासा
शोधकर्ताओं ने बेरिएट्रिक सर्जरी कराने वाले 2007 लोगों के डाटा का तुलनात्मक विश्लेषण मोटापा के शिकार कंट्रोल ग्रुप (जिन्होंने बेरिएट्रिक ...और पढ़ें

HighLights
- बेरिएट्रिक सर्जरी से कम होता है ब्लड कैंसर का खतरा
- लिंफोमा में 55 प्रतिशत तक कम होता है जोखिम
- मोटापे से ग्रस्त डायबिटिक महिलाओं को सर्जरी से होता है ज्यादा फायदा
गोटेबर्ग (स्वीडन), एएनआइ। Blood Cancer: पहले के अध्ययनों में शरीर का ज्यादा वजन या मोटापे का संबंध विभिन्न प्रकार के कैंसर के कारक के रूप में सामने आया है। यह बात भी सामने आ चुकी है कि मोटी महिलाओं को अपने समकक्ष पुरुषों की तुलना में कैंसर होने का खतरा ज्यादा होता है और वजन कम करने के उपायों के सहारे उस खतरे को कम किया जा सकता है, लेकिन मोटापा या वजन कम करने का संबंध रक्त संबंधी कैंसर को लेकर बहुत कम ही जानकारी या प्रमाण प्रस्तुत किए गए हैं।
बेरिएट्रिक सर्जरी से ब्लड कैंसर का कम खतरा
हाल ही में, इस संबंध में हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि जिन लोगों ने वजन कम करने के लिए बेरिएट्रिक सर्जरी (Bariatric surger) कराई, उनमें ब्लड कैंसर का खतरा कम पाया गया। यह अध्ययन लैंसेट हेल्दी लांजिविटी नामक वैज्ञानिक शोध जर्नल में प्रकाशित किया गया है। इस अध्ययन के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ गोटेनबर्ग तथा नेशनल बोर्ड आफ हेल्थ एंड वेलफेयर्स कैंसर रजिस्ट्री के डाटा का इस्तेमाल किया गया।
लिंफोमा से पीड़ित लोगों को हुआ कैंसर
शोधकर्ताओं ने बेरिएट्रिक सर्जरी कराने वाले 2007 लोगों के डाटा का तुलनात्मक विश्लेषण मोटापा के शिकार कंट्रोल ग्रुप (जिन्होंने बेरिएट्रिक सर्जरी नहीं कराई थी) के 2040 लोगों के रिकार्ड से किया। फालोअप अध्ययन काल में पाया गया कि सर्जरी वाले ग्रुप के सदस्यों में से 34 लोगों को वजन कम होने के बावजूद रक्त संबंधी कैंसर हुआ, जबकि कंट्रोल ग्रुप के सदस्यों में 51 लोग रक्त संबंधी कैंसर से पीड़ित पाए गए।
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कैंसर से ग्रस्त होने वालों में अधिकांश को लिंफोमा हुआ था। जब अलग से इनका अध्ययन किया गया तो पाया गया कि बेरिएट्रिक सर्जरी कराने वाले ग्रुप के सदस्यों में लिंफोमा का जोखिम 55 प्रतिशत कम था, जबकि अन्य प्रकार के ब्लड कैंसर के खतरे में 40 प्रतिशत की कमी आई।
डायबिटिक महिलाओं को बेरिएट्रिक सर्जरी का मिला लाभ
यूनिवर्सिटी आफ गोटेनबर्ग के मालीक्यूलर एंड क्लीनिकल मेडिसिन एकेडमी में एसोसिएट प्रोफेसर और इस अध्ययन की लेखिका मागदालेना ताउबे ने बताया कि डायबिटिक (हाई ब्लड शुगर) महिलाओं को बेरिएट्रिक सर्जरी का ज्यादा लाभ हुआ। उन्होंने बताया कि सर्जरी का लाभ बेसलाइन ब्लड ग्लूकोज के स्तर से संबद्ध है।
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ताउबे ने कहा कि यदि शुरुआत में महिलाओं का ब्लड ग्लूकोज लेवल कम था तो ब्लड कैंसर का कम जोखिम कम था और ब्लड शुगर लेवल अधिक होने से कैंसर का खतरा भी अधिक था। इससे स्पष्ट है ब्लड शुगर लेवल कैंसर के विकास में एक महत्वपूर्ण कारक है।
सर्जरी के बाद मेटाबोलिज्म में होता है सकारात्मक असर
शोधकर्ताओं ने मोटापा और ब्लड कैंसर के बीच जटिल तंत्र का विश्लेषण किया। इनमें क्रानिक सूजन तथा एक प्रकार के ब्लड कैंसर (क्लोनल हेमटोपोइजिस) के लिए अनुवांशिक कारकों की भी पहचान की। उनके मुताबिक, बेरिएट्रिक सर्जरी के बाद सूजन कम होने समेत मेटाबोलिज्म में सुधार जैसे बदलाव कैंसर के खतरे को कम कर सकता है। ये निष्कर्ष संकेत देते हैं कि मोटापे की शिकार महिलाएं यदि बेरिएट्रक सर्जरी कराती हैं तो उनमें ब्लड कैंसर का जोखिम खासतौर पर कम होता है।
