'चुनाव आते ही हिंदू होने का ढोंग क्यों?', राहुल गांधी के पुराने बयानों का वीडियो शेयर कर BJP ने कसा तंज
भाजपा ने राहुल गांधी पर चुनाव के समय हिंदू होने का ढोंग करने का आरोप लगाया है। पार्टी ने उनके ...और पढ़ें

भाजपा ने हिंदुत्व पर राहुल की पुरानी टिप्पणियों को लेकर साधा निशाना।
HighLights
भाजपा ने राहुल गांधी पर 'चुनावी हिंदू' होने का आरोप लगाया।
पुराने वीडियो में राहुल के हिंदुत्व विरोधी बयान दिखाए गए।
भाजपा ने CEC नियुक्ति प्रक्रिया पर कांग्रेस को घेरा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राहुल गांधी की हिंदुत्व, हिंदू धर्म और धार्मिक हस्तियों पर पुरानी टिप्पणियों का वीडियो साझा करते हुए भाजपा ने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आने पर कांग्रेस नेता हिंदू होने का ‘ढोंग’ करते हैं।
यह मामला गांधी की उस पोस्ट के कुछ दिन बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने भगवान शिव से जुड़े पवित्र ‘त्रिपुंड तिलक’ की तस्वीर साझा कर उसके साथ ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ लिखा था।
सुलतानपुर की एमपी-एमएलए अदालत ने 2018 में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ उनकी टिप्पणियों से जुड़े मानहानि के मामले में राहुल गांधी को बरी किया था।
भाजपा ने इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। इसमें पहले राहुल गांधी की एक्स पोस्ट दिखाई गई और फिर तुलना के लिए हिंदुत्व और हिंदू धर्म पर उनके भाषणों के अंश दिखाए गए।
पृष्ठभूमि में ‘क्या हुआ तेरा वादा’ गीत बज रहा था। एक्स पर पोस्ट के कैप्शन में लिखा था, 'अगर आप हिंदुओं से इतनी नफरत करते हैं, तो हर बार चुनाव आने पर हिंदू होने का ढोंग क्यों करते हैं, राहुल जी?'
एक अंश में राहुल गांधी कहते सुनाई देते हैं, 'हमें इन हिंदुत्ववादियों को एक बार फिर बाहर करना होगा।' एक अन्य अंश में वह कहते हैं, 'जो खुद को हिंदू कहते हैं, वे 24 घंटे हिंसा, हिंसा, हिंसा में लगे रहते हैं। नफरत, नफरत, नफरत। झूठ, झूठ, झूठ।'
एक दूसरे अंश में उन्हें यह कहते सुना जा सकता है,"लोग मंदिरों में जाते हैं, सिर झुकाते हैं और देवी की पूजा करते हैं। फिर भी, यही लोग बसों में आपको परेशान करते हैं। यही लोग आपका उत्पीड़न करते हैं।" वीडियो में कांग्रेस नेता को यह कहते हुए भी दिखाया गया है,'सभी पौराणिक पात्र हैं। भगवान राम उसी युग के थे, है न?'
भाजपा ने मुख्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया की आलोचना करने को लेकर कांग्रेस से सवाल किया। पार्टी ने दावा किया कि कांग्रेस के शासनकाल में चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए न तो कोई कानून था और न ही कोई समिति। प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल विपक्ष के नेता से परामर्श किए बिना नाम तय करते थे।
भाजपा ने कहा, 'क्या आपको पता है? कांग्रेस के शासनकाल में मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन के लिए न तो कोई कानून था और न ही कोई समिति। प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल अपनी मर्जी से नाम तय करते थे; विपक्ष के नेता से तो परामर्श भी नहीं किया जाता था। आज वही कांग्रेस एक पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था पर सवाल उठा रही है।'
पार्टी ने गांधी से पूछा कि मुख्य चुनाव आयुक्त और निर्वाचन आयोग के कामकाज पर उनका मौजूदा रुख लोकतंत्र के प्रति चिंता है या सत्ता से दूर रहने का नतीजा।
सोर्स- न्यूज एजेंसी PTI के इनपुट के अनुसार
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