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Bihar New CM: बिहार में कब होगा नए मुख्यमंत्री के नाम का एलान? भाजपा का ये फॉर्मूला बदल देगा पूरा खेल

By Arvind SharmaEdited By: Deepak Gupta
Published: Thu, 05 Mar 2026 10:31 PM (IST)

नीतीश कुमार के राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ने से बिहार में पहली बार भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनेगी। राज्यसभा चुनाव के बाद नए मुख्यमंत्री के नाम पर मंथन होगा।

बिहार में कब होगा नए सीएम के नाम का एलान। (फाइल)

बिहार में कब होगा नए सीएम के नाम का एलान। (फाइल)

HighLights

  1. नीतीश कुमार के राष्ट्रीय राजनीति में जाने से भाजपा नेतृत्व।

  2. राज्यसभा चुनाव के बाद नए मुख्यमंत्री पर होगा फैसला।

  3. मंत्रिमंडल विस्तार, गृह विभाग और उपमुख्यमंत्री पदों पर चर्चा।

अरविंद शर्मा, नई दिल्ली। दो दशकों तक बिहार की राजनीति को दिशा देने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ चले हैं और पहली बार बिहार में सत्ता की कमान भाजपा के पास होगी। लेकिन साझा सरकार के गठन में पुराने फार्मूले को कमोबेश माना जाएगा। हालांकि सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया तुरंत पूरी नहीं होगी। संसदीय औपचारिकताओं के बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।

नीतीश कुमार सहित एनडीए के सभी पांचों प्रत्याशियों के राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नेतृत्व परिवर्तन पर औपचारिक मंथन शुरू होगा। राज्यसभा चुनाव के नतीजे 16 मार्च को आने हैं। इसके बाद नई सरकार के गठन और नेतृत्व को लेकर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

नई सरकार के गठन में गठबंधन संतुलन भी अहम भूमिका निभाएगा। विधानसभा अध्यक्ष का पद भी अहम मुद्दा बन सकता है। फिलहाल यह भाजपा के पास है। यदि पुराने गठबंधन संतुलन को बनाए रखने की कोशिश हुई तो यह जिम्मेदारी जदयू को सौंपी जा सकती है। इसी तरह गृह विभाग पर भी चर्चा होगी।

भाजपा के पास रह सकता है गृह विभाग

वर्तमान सरकार में यह विभाग भाजपा के पास है और नई व्यवस्था में भी इसे भाजपा के पास बनाए रखने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन वर्तमान फार्मूले के तहत जदयू की दावेदारी भी कमजोर नहीं होगी। मंत्रिमंडल की संरचना में भी बदलाव लगभग तय है। फिलहाल बिहार सरकार में कुल 26 मंत्री हैं। इनमें भाजपा के 14 मंत्री हैं, जबकि जदयू के मुख्यमंत्री सहित नौ मंत्री हैं। शेष पद सहयोगी दलों के पास हैं।

नए राजनीतिक समीकरण में जदयू अपने मंत्रियों की संख्या बढ़ाने का प्रयास कर सकता है, ताकि सत्ता में संतुलन बना रहे और गठबंधन की साझेदारी मजबूत दिखाई दे।सबसे अहम चर्चा मुख्यमंत्री पद को लेकर होगी। भाजपा के भीतर कई नामों पर चर्चा चल रही है।

वर्तमान सरकार में भाजपा की ओर से दो उपमुख्यमंत्री हैं-सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा। दोनों को संभावित दावेदारों के रूप में देखा जा रहा है। इनके अलावा पार्टी के भीतर संजीव चौरसिया, जनक राम और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के नाम भी चर्चा में हैं।

संगठनात्मक पृष्ठभूमि और सामाजिक समीकरणों पर ध्यान

भाजपा नेतृत्व अंतिम निर्णय लेते समय राजनीतिक अनुभव, संगठनात्मक पृष्ठभूमि और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रख सकता है। सम्राट चौधरी का नाम इसलिए प्रमुख माना जा रहा है क्योंकि वे कोयरी समुदाय से आते हैं, जो बिहार की प्रमुख पिछड़ी जातियों में से एक है।

लंबे समय से इस समुदाय से मुख्यमंत्री न बनने की चर्चा भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रही है। दूसरी ओर नित्यानंद राय को संगठन और विचारधारा से जुड़े नेता के रूप में देखा जाता है। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आते हैं और छात्र राजनीति में विद्यार्थी परिषद से सक्रिय रहे हैं।

नए या कम चर्चित चेहरे को भी आगे बढ़ा सकती है भाजपा

राय यादव समुदाय से आते हैं, जो राज्य की सबसे बड़ी जाति है और जिसे परंपरागत रूप से राजद का मजबूत सामाजिक आधार माना जाता है।भाजपा के भीतर यह संभावना भी चर्चा में है कि पार्टी अपेक्षाकृत नए या कम चर्चित चेहरे को भी आगे बढ़ा सकती है।

हाल के वर्षों में कई राज्यों में भाजपा ने इसी तरह अप्रत्याशित नेतृत्व को आगे लाकर राजनीतिक संदेश देने की रणनीति अपनाई है। ऐसे में बिहार के नए मुख्यमंत्री को लेकर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व के राजनीतिक आकलन और सामाजिक समीकरणों के संतुलन पर निर्भर करेगा।

मौजूदा व्यवस्था को देखते हुए जदयू को दो उपमुख्यमंत्री पद मिल सकता है। पार्टी के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी का नाम इस संदर्भ में प्रमुखता से लिया जा रहा है। दूसरी ओर, नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार के राजनीति में सक्रिय होने की घोषणा ने भी नई चर्चा को जन्म दिया है। ऐसे में उन्हें भी उपमुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरे के रूप में देखा जा रहा है।

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