इंदौर, जेएनएन। कोविड-19 महामारी ने काफी मुश्किलें ख़़डी की हैं, लेकिन इसके कारण सुविधा संपन्न छोटे शहरों में रियल एस्टेट सेक्टर को संजीवनी भी मिल रही है। आइटी और टेक्नोलॉजी सेक्टर की कुछ कंपनियां टियर--2 शहरों में विस्तार के लिए 'हब एंड स्पोक मॉडल' अपना रही हैं। यानी वे वितरण व्यवस्था को विकेंद्रीकृत कर रही हैं। मौजूदा चुनौतीपूर्ण दौर में कंपनियों पर कम लागत में विस्तार का दबाव है, लिहाजा विप्रो,अमेजन और ओयो जैसी कंपनियां इंदौर में कार्यालय खोल रही हैं। इससे शहर में मकानों की मांग भी ब़़ढी हैं।

इंदौर के अलावा ये कंपनियां कोच्चि, जयपुर और कोयंबटूर जैसे शहरों में भी कार्यालय खोल रही हैं। इंदौर में तो टीसीएस और इंफोसिस जैसी दिग्गज आइटी कंपनियों ने पहले से ही काफी निवेश कर रखा है। अब इस शहर में रिटेल और आतिथ्य क्षेत्र की ग्लोबल कंपनियां भी दिलचस्पी ले रही हैं।

लागत घटाने की रणनीति हाउसिंग डॉट कॉम के ग्रुप के सीओओ ([मुख्य परिचालन अधिकारी)] मणि रंगराजन के मुताबिक दरअसल कंपनियां इंदौर जैसे टियर--2 व टियर--3 के ऐसे शहरों में छोटे कार्यालय खोलने की योजना पर काम कर रही हैं, जहां कर्मचारियों के आवास व्यवस्था की लागत कम बैठती है और कम वेतन पर ब़़डी तादाद में प्रोफेशनल्स उपलब्ध हैं। रंगराजन के मुताबिक कंपनियों को लगता है कि इंदौर जैसे शहर उन्हें कम जोखिम वाला माहौल मुहैया करा सकते हैं।

'उ़़डान स्कीम' का असर केंद्र सरकार की 'उ़़डान स्कीम' के तहत छोटे एयरपोर्ट खोले जाने और कम दूरी के विमान यात्रा का किराया एक दायरे में रखे जाने से इंदौर की एयर कनेक्टिविटी ब़़ढी है। एक वजह यह भी है कि कॉरपोरेट्स यहां छोटे कार्यालय खोलने के लिए उत्साहित हैं। दिल्ली और मुंबई के साथ--साथ इंदौर की बेंगलुरू, हैदराबाद और पुणे जैसे ब़़डे शहरों के साथ एयर कनेक्टिविटी है।

लॉकडाउन के पहले तक इंदौर एयरपोर्ट से रोजाना 92 उ़़डानों की आवाजाही होती थी। इसमें दुबई के लिए सीधी उ़़डान भी शामिल हैं, लेकिन 23 मार्च को रोक के बाद अनलॉक में दोबारा उ़़डानों को मंजूरी दी गई। इसके बाद फिलहाल इंदौर से 36 उ़़डानों का संचालन होने लगा है। मकानों की मांग ब़़ढीं औद्योगिक गतिविधियां ब़़ढने से शहर में मकानों की मांग भी पटरी पर लौट रही है। क्रेडाई इंदौर के चेयरमैन लीलाधर माहेश्वरी ने कहा कि पिछले कुछ महीनों से तैयार मकानों की मांग अच्छी रही है। जो प्रोजेक्ट अगले तीन--चार महीनों में डिलीवरी देने वाले हैं, उनकी मांग ब़़ढी है। 800--1500 स्क्वेयर फीट तक के प्लॉट की मांग मकानों के मुकाबले ज्यादा है।

2019 की तुलना में जुलाई से अब तक कारोबार 65 प्रतिशत तक पहंुच गया है। 35 प्रतिशत का जो अंतर रह गया है, वह शहर में कोविड--19 के मामले ब़़ढने की वजह से है, क्योंकि लोग निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। कोविड का सकारात्मक प्रभाव क्रेडाई इंदौर के अध्यक्ष नवीन मेहता के मुताबिक कोविड--19 की तमाम नकारात्मकता के बीच एक अच्छा असर यह भी हुआ कि कारपोरेट्स इंदौर का रख कर रहे हैं। वे न सिर्फ कार्यालय के लिए जगह देख रहे हैं, बल्कि अपने कर्मचारियों के लिए आवासीय परिसरों की जानकारी भी जुटा रहे हैं। दरअसल, लोगों के जेहन में सुविधा और सुरक्षा के साथ आवास की प्राथमिकता सबसे पहले आती है। इंदौर ऐसा ही शहर है और इसीलिए पिछले कुछ महीनों के दौरान यहां मांग ब़़ढी हैं।

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