'भोजशाला हिंदू मंदिर है...',अयोध्या फैसले के सिद्धांतों ने कैसे दिखाई कोर्ट को राह?
मध्य प्रदेश के धार में भोजशाला परिसर को हाई कोर्ट ने देवी वाग्देवी/सरस्वती को समर्पित हिंदू मंदिर घोषित किया है, जिसके बाद भक्तों ने वहां पूजा-अर्चना शुरू कर दी है।

अयोध्या फैसले के सिद्धांतों ने कैसे दिखाई कोर्ट को राह। (फाइल)
HighLights
हाई कोर्ट ने भोजशाला को हिंदू मंदिर घोषित किया।
भक्तों ने सालों बाद भोजशाला में पूजा-अर्चना की।
कोर्ट ने अयोध्या मामले के सिद्धांतों का हवाला दिया।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के धार में हाई कोर्ट के फैसले के बाद हिंदू मंदिर, जो देवी वाग्देवी या सरस्वती को समर्पित है और जो संस्कृत सीखने का एक केंद्र भी है, लोगों ने भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना शुरू कर दी है।
एक भक्त ने कहा कि सालों बाद हमें बिना किसी रुकावट के दर्शन करने का मौका मिला। कोर्ट ने बहुत बढ़िया फैसला दिया है। मैं यहां हर दिन पूजा करने आऊंगा।
भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक कुमार जैन ने कहा कि कम हम इतने खुश थे, उतने खुश पहले कभी नहीं थे। हिंदू समुदाय लंबे समय से संघर्ष कर रहा था और इस संघर्ष में हमारे तीन भाई शहीद हो गए। उन्हीं की वजह से और अनगिनत अन्य लोगों के प्रयासों से ही भोजशाला में मां सरस्वती मंदिर के ताले खुले हैं। आज सुबह, मैं यहां पहुंचने वाला पहले व्यक्ति था और इस उद्देश्य के लिए आंदोलन कर रहे अन्य लोगों के साथ मिलकर, मैंने मंदिर में सुबह पूजा की।
#WATCH | Madhya Pradesh | People enter Bhojshala complex in Dhar to offer prayers after the High Court declared the Bhojshala site as a temple pic.twitter.com/wlKTd1kQkQ
— ANI (@ANI) May 16, 2026
हिंदू और सनातन संस्कृति की जीत थी- गोपाल शर्मा
भोजशाला मुक्ति यज्ञ के कॉर्डिनेटर गोपाल शर्मा ने कहा कि यह मेरी लड़ाई नहीं थी, बल्कि पूरे हिंदू समुदाय की लड़ाई थी। यह सिर्फ एक जगह के लिए नहीं थी, बल्कि हिंदू और सनातन संस्कृति की जीत थी। 720 सालों तक, यहां के हिंदू समुदाय ने अपमान महसूस किया और हर तरह का बलिदान दिया, लेकिन कल जो कोर्ट का फैसला आया है, वह इस बड़े संघर्ष में सिर्फ एक पड़ाव है।
जब तक भोजशाला की गरिमा पूरी तरह से बहाल नहीं हो जाती और यह जगह राजा भोज के समय वाले अपने स्वरूप को फिर से प्राप्त नहीं कर लेती, तब तक धार का हिंदू समुदाय अपने प्रयास जारी रखेगा। मुझे उन लोगों की याद आती है जिन्होंने सालो तक इस आंदोलन का नेतृत्व किया और जिन्होंने इसे आम लोगों तक पहुंचाने में मार्गदर्शन किया।
हाईकोर्ट ने दिया अयोध्या मामले का हवाला
अयोध्या मामले के सिद्धांतों का हवाला देते हुए, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने कहा कि धार में भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर का धार्मिक स्वरूप "संस्कृत शिक्षा के केंद्र और देवी वाग्देवी/ सरस्वती को समर्पित हिंदू मंदिर" का है।
यह स्थल परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा था- कोर्ट
अयोध्या मामले के सिद्धांतों का हवाला देते हुए, कोर्ट ने माना कि पुरातत्व में बहु-विषयक व्याख्या शामिल होती है, और कहा उसने ASI के निष्कर्षों के साथ-साथ ऐतिहासिक और साहित्यिक सामग्री पर भी भरोसा किया है। कोर्ट ने अपने नोट में रहा कहा कि ऐतिहासिक रिकॉर्ड से पता चलता है कि यह स्थल परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा था और देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर के संदर्भ मिलते हैं।
कोर्ट ने इस स्थल को 'प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल तथा अवशेष अधिनियम' के तहत 18 मार्च 1904 से प्रभावी रूप से एक संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस स्थल के संरक्षण, रखरखाव और यहां पहुंच के नियमन पर ASI का पर्यवेक्षी नियंत्रण जारी रहेगा।
कोर्ट ने ASI के 2003 के आदेश को किया रद
अपने कार्यकारी निर्देशों में, कोर्ट ने ASI के 2003 के उस आदेश को भी रद कर दिया, जिसने हिंदुओं को केवल मंगलवार को पूजा करने की अनुमति दी थी, जबकि मुसलमानों को शुक्रवार को नमाज पढ़ने की अनुमति थी। केंद्र सरकार और ASI से कहा गया है कि वे इस स्थल का प्रशासन और प्रबंधन एक भोजशाला मंदिर और संस्कृत शिक्षा के केंद्र के रूप में अपने हाथ में ले लें, साथ ही धार जिले में एक मस्जिद के निर्माण के लिए वैकल्पिक जमीन का सुझाव दें।
