नई दिल्ली, एएनआइ। भारत को प्रभावित करने वाली कोरोना महामारी की तीनों लहरों का विश्लेषण करने वाले विशषज्ञों का कहना है कि तीसरी लहर में सभी स्तरों पर तैयारियां बेहतर हैं। उनका यह भी कहना है कि अगले कुछ हफ्ते से पहले यह कहना मुश्किल है कि तीसरी लहर चरम पर कब होगी।

बेंगलुरु स्थित फोर्टिस अस्पताल के पल्मोनोलाजी विभाग के निदेशक डा. विवेक आनंद पडेगल ने कहा कि पहली लहर की धीमी शुरुआत हुई और धीरे-धीरे गंभीर होती गई। पहली लहर में पांच से 10 प्रतिशत मरीजों को आक्सीजन की जरूरत पड़ी। दूसरी लहर तेजी से बढ़ी और चरम पर पहुंच गई और फिर उसके बाद दो से ढाई महीने में उसका प्रभाव कम हुआ। उन्होंने कहा कि अब तीसरी लहर चल रही है और मरीज बेहतर स्थिति में हैं। आइसीयू में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या कम है। लक्षण भी अलग-अलग हैं।

ज्यादातर लोगों को छींकने, नाक बहने और सिर दर्द की शिकायतें हैं। हालांकि, अगले कुछ हफ्ते तक यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस लहर के चरम पर पहुंचने में लक्षण में बदलाव होता है या नहीं। गुरुग्राम स्थित मैक्स अस्पताल में मेडिकल एडवाइजर और इंटरनल मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ निदेशक डा. आशुतोष शुक्ल का कहना है कि कोरोना महामारी की तीसरी लहर में सभी स्तरों पर तैयारियां बेहतर हैं। उन्होंने कहा कि मार्च 2020 में पहली लहर अपनी चरम पर थी। उस समय किसी को भी इस बीमारी के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था।

ज्यादातर मरीज भी ज्यादा उम्र के और गंभीर रोगों से ग्रस्त थे। ज्यादातर मरीजों को सांस लेने में दिक्कत हुई। तब किसी को टीके नहीं लगे थे और न ही किसी के पास बचाव के लिए पीपीई जैसे किट ही थे। दूसरी लहर में वायरस के कई वैरिएंट सामने आए। मरीजों को सांस की सबसे ज्यादा परेशानी हुई। दूसरी लहर में महामारी की गंभीर स्थिति देखने को मिली जिसमें बड़ी संख्या में लोग संक्रमित भी हुए और मौतें भी हुईं। तीसरी लहर के दौरान हालात बेहतर हैं। व्यक्तिगत स्तर पर भी लोगों को इस बीमारी के बारे में पता है। सामुदायिक स्तर पर भी जागरूकता है और सरकारी स्तर पर इससे निपटने की तैयारी बढि़या है। इस तरह व्यक्तिगत, सामुदायिक और सरकारी तीनों ही स्तर पर बेहतर तैयारी है। 

Edited By: Monika Minal