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प्रदर्शनकारियों को धक्का दिया, घसीटा और जबरन बस में भरा... बेंगलुरु में पुलिस पर पत्रकारों से भी मारपीट का आरोप

Published: Tue, 13 Oct 2026 09:52 AM (IST)

बेंगलुरु में पुलिस ने दिल्ली में SIR के खिलाफ प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों को हिरासत में लिया और पत्रकारों से भी मारपीट की।

बेंगलुरु में पुलिस ने कवरेज कर रहे पत्रकारों के साथ मारपीट की।

बेंगलुरु में पुलिस ने कवरेज कर रहे पत्रकारों के साथ मारपीट की।

HighLights

  1. बेंगलुरु में SIR विरोधी प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया।

  2. पुलिस ने कवरेज कर रहे पत्रकारों के साथ भी मारपीट की।

  3. सोशल मीडिया पर पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की गई।

डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। सोमवार को एक तरफ कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और गृहमंत्री प्रियांक खरगे दिल्ली में वोटर लिस्ट के SIR और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ विरोध कर रहें थे वहीं दूसरी तरफ बेंगलुरु में पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और कार्रवाई की कवरेज कर रहे जर्नलिस्ट्स के साथ मारपीट की।

सादे कपड़ों में मौजूद थे पुलिसकर्मी

सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी SJP कॉलेज के बाहर प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों के साथ मारपीट करते नजर आए। SJP कॉलेज फ्रीडम पार्क से 1 किमी के अंदर है और मुख्य चुनाव अधिकारी के दफ्तर के ठीक सामने हैं।

छात्र, वकील, एक्टिविस्ट और एकेडमिक्स समेत कई प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव अधिकारी के दफ्तर तक मार्च करने के लिए इकट्ठा हुए थे। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि SIR को रद किया जाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें।

महिला प्रदर्शनकारियों के कपड़े खींचते दिखे पुलिसकर्मी

एक्टिविस्ट ग्रुप 'माई वोट, माई राइट' के मुताबिक मार्च शुरू होने से पहले ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेना शुरू कर दिया। ग्रुप ने मामले की जानकारी देते हुए कहा कि मार्च शुरू करने से पहले ही पुलिस ने प्लेकार्ड जब्त कर लिए और लोगों को हिरासत में ले लिया।

ग्रुप ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को धक्का दिया गया, घसीटा गया और जबरदस्ती बसों में ले जाया गया। ग्रुप ने बताया कि पुलिस कर्मी युवा प्रदर्शनकारियों की पिटाई करते और महिला प्रदर्शनकारियों के कपड़े खींचते हुए भी दिखे।

वकील विनय श्रीनिवासा ने बताया कि पुलिसकर्मियों ने बल प्रयोग किया, हममें से कई लोगों को हिरासत में लिया और बाद में CAR ग्राउंड्स पर छोड़ दिया। 'ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन फॉर जस्टिस' के नेशनल जनरल सेक्रेटरी क्लिफ्टन रोजारियों के साथ मारपीट की गई।

पत्रकारों को बनाया गया निशाना

विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई की कवरेज कर रहे फोटो जर्नलिस्ट्स को भी निशाना बनाया गया। एक फोटो जर्नलिस्ट की चार पुलिसकर्मियों ने पिटाई की, जबकि तीन अन्य पत्रकारों के साथ बदसलूकी की गई।

घटना के कवरेज कर रहे एक फोटो जर्नलिस्ट ने बताया कि पुलिस ने छात्रों के एक समूह के साथ मारपीट की और जब पत्रकारों ने कार्रवाई को रिकॉर्ड करने की कोशिश की तो उन्होंने आपत्ति जताई। जब उन्होंने रिकॉर्डिंग जारी रखी, तो एक अफसर ने उनसे फुटेज डिलीट करने को कहा।

पत्रकार ने बताया जब हमने महिला प्रदर्शनकारियों की हिरासत को रिकॉर्ड करना जारी रखा तो पुलिसकर्मियों ने आपत्ति जताई। एक फोटो जर्नलिस्ट को धमकी दी गई और पीटा गया, जबकि दूसरे को धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया गया।

पुलिस ने उसका फोन छीनकर दूर फेंक दिया था। उसने बताया कि उसका कॉलर खींचा गया, पीछे से धक्का दिया गया और पैर पर मारा गया। एक अफसर ने उसे जेल में डालने की भी धमकी दी।

पत्रकारों ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदर्शनस्थल पर महिला पुलिसकर्मी कम थीं और पुरुष ऑफिसर ही प्रदर्शनकारियों को संभाल रहे थे।

छात्र क्यों कर रहे थे प्रदर्शन

यह विरोध प्रदर्शन दिल्ली में SIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों पर पुलिस की कार्रवाई की निंदा करने के लिए आयोजित किया गया था। वहां SIR को रद करने और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान एक्टिविस्ट, वकील, छात्र और पत्रकारों को हिरासत में लिया गया था।

बेंगलुरु की कार्रवाई की सोशल मीडिया पर आलोचना

बेंगलुरु में हुई गिरफ्तारियों की सोशल मीडिया पर आलोचना हुई, कई लोगों ने कहा कि उनके परिवार के सदस्यों को हिरासत में लिया गया।

अशोका यूनिवर्सिटी में राइटिंग की एसोसिएट प्रोफेसर अर्पिता दास ने X पर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और खरगे को टैग करते हुए लिखा, 'बेंगलुरु में SIR-विरोधी प्रदर्शनों में शामिल होने गई मेरी बेटी और उसकी दोस्त को अभी हिरासत में ले लिया गया है। कांग्रेस-शासित राज्य में ऐसा क्यों हो रहा है, जबकि युवा आपके मकसद के समर्थन में आगे आ रहे हैं? कृपया जवाब दें।'

पुलिस की कार्रवाई का वीडियो शेयर करते हुए प्रतीक वाघरे ने प्रदर्शनकारियों के प्रति कर्नाटक सरकार के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने खरगे को टैग करते हुए लिखा,' RSS के खिलाफ आपके तमाम बयानों के बावजूद आपकी पुलिस ऐसे काम कर रही है जैसे वह RSS से जुड़ी किसी राजनीतिक पार्टी द्वारा चलाई जा रही हो।'

DCP अक्षय एम. हकाय ने कहा कि KR सर्कल के पास बिना इजाजत जमा हुए प्रदर्शनकारियों से फ्रीडम पार्क जाने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसके बाद उन्हें एहतियातन हिरासत में लिया गया और बाद में छोड़ दिया गया।

उन्होंने कहा कि पुलिस ने संयम बरता और पत्रकारों व पुलिसकर्मियों के बीच टकराव पूरी तरह से अनजाने में और तनावपूर्ण हालात में हुआ। बेंगलुरु सिटी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करने और सिर्फ फ्रीडम पार्क में ही प्रदर्शन करने की अपील की।

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