बैक ऑफ बड़ौदा के कस्टमर्स का डेटा लीक? डार्क वेब पर 1TB डेटा अपलोड करने का दावा
बैंक ऑफ बड़ौदा में 1TB ग्राहक डेटा लीक होने की आशंका है, जिसे एक हैकर ने डार्क वेब पर अपलोड करने का दावा किया है।

बैंक ऑफ बड़ौदा का डेटा लीक होने का दावा

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बैंक ऑफ बड़ौदा में एक बड़े डेटा लीक की आशंका जताई जा रही है, जिसे देश के किसी बैंक से जुड़ा सबसे बड़ा साइबर हमला कहा जा रहा है। एक हैकर का दावा है कि उसने बैंक के सर्वरों से लगभग 1 TB डेटा लीक किया है और इसे ऑनलाइन अपलोड कर दिया है।
इंडिया टूडे की रिपोर्ट के अनुसार, हैकर ने डेटा लीक से जुड़े कुछ दस्तावेज भी ऑनलाइन साझा किए हैं। लीक हुए डेटासेट में ग्राहकों के नाम, मोबाइल नंबर, पहचान पत्र, बचत व चालू खाता रिकॉर्ड और ऋण संबंधी दस्तावेज शामिल हैं। हालांकि, इसको लेकर अभी तक बैंक ऑफ बड़ौदा ने आधिकारिक तौर पर इस उल्लंघन की पुष्टि नहीं की है।
साइबर आपदा
दरअसल, कैशलेस कंज्यूमर के संस्थापक और सॉफ्टवेयर इंजीनियर श्रीकांत लक्ष्मणन ने एक्स पर स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए कहा कि लीक हुए डेटा का लिंक सक्रिय है और उन्होंने इस घटना को "एक साइबर आपदा" बताया।
रिपोर्ट के अनुसार, लक्ष्मणन ने दावा किया कि वह लीक हुई फाइलों के एक हिस्से को सत्यापित करने में सक्षम थे, जिनमें कथित तौर पर बैंक ऑफ बड़ौदा के आंतरिक दस्तावेज जैसे कि शाखा लेखापरीक्षा रिपोर्ट, ऋण मूल्यांकन दस्तावेज, आंतरिक संचार, सतर्कता जांच रिकॉर्ड, बॉबवर्ल्ड लेखापरीक्षा रिपोर्ट और देश भर की कई शाखाओं से ग्राहक आवेदन पत्र शामिल हैं।
Root folder of the data dump of @bankofbaroda #Databreach by threat actor. More verification links in the thread. The link is live.
— Srikanth.CashlessConsumer | ஸ்ரீகாந்த் (@logic) July 26, 2026
This is SOS @Cyberdost @RBI
cc @latha_venkatesh @dugalira @nit_set @suchetadalal https://t.co/6HZ2c6V6S5 pic.twitter.com/tWFCKJWv8Q
डार्क वेब ट्रैकिंग वेबसाइट पर दी गई जानकारी
लक्ष्मणन के अनुसार, इस उल्लंघन की जानकारी सबसे पहले 25 जुलाई को डार्क वेब ट्रैकिंग वेबसाइट ransomeware.live द्वारा दी गई थी। हैकर का दावा है कि उसने डार्क वेब पर लगभग 1 टीबी संवेदनशील डेटा लीक किया है।
कौन-कौन सी जानकारी हो सकती है लीक?
फिलहाल इसको लेकर बैंक ऑफ बड़ौदा की तरफ से पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन अगर यह डेटा असली है और यह काफी हद तक असली लग रहा है, तो इससे ग्राहकों को फिशिंग हमलों, पहचान की चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी का खतरा हो सकता है।
- ग्राहक के नाम
- मोबाइल फोन नंबर
- आधार संख्या
- बचत और चालू खाता रिकॉर्ड
- ऋण संबंधी जानकारी
- नेटबैंकिंग उपयोगकर्ता रिकॉर्ड
- एनआरआई और कॉर्पोरेट बैंकिंग रिकॉर्ड
- ग्राहक सहायता सामग्री
- शाखा और एटीएम से संबंधित रिकॉर्ड
1TB डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध
यानी अगर आप बैंक ऑफ बड़ौदा के ग्राहक हैं, तो संभावना है कि आपके खाते से संबंधित ऊपर उल्लिखित विवरण 1TB डेटा में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं, और यह डाउनलोड के लिए उपलब्ध है और आपकी पहचान और नाम से स्पष्ट रूप से जुड़ा हुआ है।
इस बीच, अभी तक इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि पासवर्ड, एटीएम पिन, यूपीआई पिन या ओटीपी भी लीक हुए हैं।
अगर लीक हुई जानकारी तो क्या होगा?
चिंता की बात यह है कि अगर आधार कार्ड की जानकारी और अन्य व्यक्तिगत जानकारी वास्तव में लीक हुई है, तो जालसाज इनका दुरुपयोग फर्जी ऋण आवेदनों, जाली केवाईसी दस्तावेजों या अन्य वित्तीय धोखाधड़ी के लिए कर सकते हैं। इससे हैकर्स को विश्वसनीय स्कैम कॉल की तैयारी करने में भी मदद मिल सकती है।
हालांकि, किसी भी हैकिंग समूह ने सार्वजनिक रूप से इस डेटा लीक की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन लक्ष्मणन का मानना है कि यह हमला ट्रिपलएक्स नामक एक अपेक्षाकृत नए साइबर अपराध समूह द्वारा किया गया हो सकता है।
