12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल पर बैंक कर्मचारी, 5 दिवसीय कार्य सप्ताह समेत क्या-क्या है मांग?
देश के प्रमुख बैंक कर्मचारी और अधिकारी संगठन 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी हड़ताल करेंगे। यह हड़ताल सरकार की नई ...और पढ़ें
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12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल में शामिल होंगे बैंक कर्मचारी संगठन (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के प्रमुख बैंक कर्मचारी और अधिकारी संगठनों ने 12 फरवरी 2026 को होने वाली देशव्यापी आम हड़ताल में शामिल होने का ऐलान किया है।
इसमें ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (AIBEA), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA) और बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI) शामिल हैं। यह हड़ताल 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (CTUs) के साथ मिलकर की जाएगी।
बैंक संगठनों का कहना है कि यह हड़ताल सरकार द्वारा लागू की जा रही चार नई श्रम संहिताओं (Labour Codes) के विरोध में है, जिन्हें नवंबर 2025 में अधिसूचित किया गया था। इन नई संहिताओं के तहत पुराने 29 श्रम कानूनों को खत्म किया गया है।
AIBOA के महासचिव एस नागराजन ने बताया कि उनका संगठन 12 फरवरी की हड़ताल को समर्थन दे रहा है और बैंक अधिकारियों से अपील की गई है कि वे हड़ताल वाले दिन लिपिकीयकाम न करें।
नई श्रम संहिताओं का विरोध
28 जनवरी 2026 को AIBEA, AIBOA और BEFI के महासचिवों द्वारा जारी पत्र में हड़ताल के कारणों को बताया गया है। पत्र में कहा गया है कि नई श्रम संहिताएं कर्मचारियों के खिलाफ हैं और ट्रेड यूनियन का पंजीकरण कराना पहले से ज्यादा कठिन बना दिया गया है।
पत्र के अनुसार, जिन संस्थानों में 300 से कम कर्मचारी हैं, वहां मालिक बिना सरकारी अनुमति के कर्मचारियों को निकाल सकते हैं। बैंक संगठनों का आरोप है कि यह कदम 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के नाम पर कंपनियों और फैक्ट्री मालिकों को फायदा पहुंचाने के लिए उठाया गया है।
बैंक कर्मचारियों के लिए 5-दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग
बैंक यूनियनों ने यह भी कहा है कि वे लंबे समय से काम और निजी जीवन में संतुलन के लिए सप्ताह में पांच दिन काम की मांग कर रहे हैं, लेकिन इसके उलट सरकार काम के घंटे बढ़ाने का प्रस्ताव ला रही है।
नागराजन ने कहा कि RBI, LIC, शेयर बाजार और कमोडिटी एक्सचेंज जैसे बड़े वित्तीय संस्थानों में पहले से ही पांच दिन का कार्य सप्ताह है, जबकि बैंक कर्मचारियों को अभी भी बारी-बारी से छह दिन काम करना पड़ता है।
फिक्स्ड-टर्म नौकरी और हड़ताल का अधिकार
बैंक संगठनों का कहना है कि देश में बेरोजगारी ज्यादा होने के बावजूद सरकार स्थायी नौकरियों के बजाय फिक्स्ड-टर्म रोजगार को बढ़ावा दे रही है, जिससे युवाओं का भविष्य असुरक्षित हो जाएगा।
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कर्मचारियों के लिए हड़ताल करना मुश्किल बनाया जा रहा है, जबकि नियोक्ताओं को लॉक-आउट और छंटनी की ज्यादा छूट दी जा रही है, वह भी बिना श्रम विभाग की अनुमति के।
