नई दिल्‍ली, एजेंसी। करीब 35 साल पहले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने राम जन्मभूमि आंदोलन के साथ खड़े होकर जिस तरह से इसे हिंदुत्व और राष्ट्र की प्रतिष्ठा से जोड़ दिया था, वह बोझ शनिवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद उसके सिर से उतर गया है। यही वजह है कि फैसला आने के कुछ ही घंटों में संघ प्रमुख मोहन भागवत सामने आए और फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि पूरी तरह से संतुष्ट है। हालांकि, काशी और मथुरा को लेकर ऐसे ही आंदोलन के सवाल को टालते हुए उन्होंने कहा कि 'हमारा काम आंदोलन का निर्माण करना नहीं है, बल्कि मनुष्य का निर्माण करना है।' राम जन्मभूमि आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पहली बार 1984 में सामने आया था।

संघ प्रमुख भागवत ने शनिवार को दिल्ली के झंडेवालान स्थित संघ कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा में यह भी साफ किया कि 'राम जन्मभूमि आंदोलन से संघ किन्हीं कारणों से अपवाद स्वरूप जुड़ा था, जो फैसला आने के बाद खत्म हो गया है।' उन्होंने कहा कि 'फैसले को हार या जीत के रूप में भी नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि पूरे समाज की एकात्मता और बंधुता के परिपोषण करने वाले निर्णय के रूप में देखना चाहिए। संघ वैसे भी इस पूरे विवाद का खात्मा चाहता था, जो हो गया है। मै इससे संतुष्ट हूं।' एक सवाल के जवाब में भागवत ने कहा कि अब जब फैसला आ गया है, तो मंदिर निर्माण का काम भी शीघ्र ही शुरु हो जाएगा। उनका मानना है कि फैसले के बाद सरकार अब विवाद को खत्म करने की दिशा में तेजी से काम करेगी। साथ ही अब अतीत की सभी बातों को भुलाकर साथ मिलकर राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण करना है।

संघ प्रमुख ने इससे पहले फैसला सुनाने वाले सभी न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं का स्वागत किया और कहा कि उनके धैर्यपूर्वक मंथन से ही यह सत्य और न्याय सामने आया है। उन्होंने इस दौरान मंदिर आंदोलन में बलिदान और सहयोग देने वाले सभी लोगों को याद करते हुए उनका भी स्वागत किया। हालांकि, राम जन्मभूमि न्यास और तराशे गए पत्थरों के सवाल पर भागवत ने कहा कि जैसे-जैसे बात आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे सब कुछ तय होगा। सारे रास्ते बनेंगे। सभी मिलकर मंदिर का निर्माण करेंगे। हालांकि संघ प्रमुख से जब यह पूछा गया कि यह विवाद आपसी बातचीत से भी सुलझ सकता था, इस पर उन्होंने कहा कि बिल्कुल हो सकता था। इसके लिए कई कोशिशें भी गई थी, लेकिन सफलता नहीं मिल पायी थी।

अयोध्या में मस्जिद के निर्माण पर संघ सतर्क, कहा-सरकार को लेना है फैसला

राम जन्मभूमि विवाद पर आए गए फैसले में मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन देने के फैसले पर संघ ने सधी हुई टिप्पणी करते हुए कहा कि वह फैसले का अध्ययन करेंगे। वैसे भी जमीन कोई उन्हें नहीं देनी है। सरकार को इस पर फैसला लेना है। हालांकि यह भी बताया गया कि अयोध्या का मतलब सिर्फ अयोध्या नगरी से नहीं है, बल्कि अयोध्या जिला भी हो सकता है। हालांकि संघ प्रमुख से इससे जुड़े सवालों पर साफ कहा कि सरकार की ओर से विवाद को खत्म करने वाली पहल होनी चाहिए।

पूजित चबूतरे पर ही होगा मंदिर के गर्भगृह का निर्माण

संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने इस दौरान मंदिर निर्माण को लेकर अनौपचारिक चर्चा में बताया कि फिलहाल शुभ मुहुर्त देखकर जल्द ही इसका निर्णय किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह साफ किया कि मंदिर का जो गर्भगृह होगा, वह मौजूदा समय में पूजित चबूतरा की होगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में अन्य सारी चीजें भी साफ हो जाएगी।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन का हक रामजन्मभूमि न्यास को देने का आदेश सुनाया है। मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए अयोध्या में ही पांच एकड़ जमीन किसी दूसरी जगह दी जाएगी। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इस बात के प्रमाण हैं कि अंग्रेजों के आने से पहले राम चबूतरा, सीता रसोई पर हिंदुओं द्वारा पूजा की जाती थी। अभिलेखों में दर्ज साक्ष्य से पता चलता है कि हिंदुओं का विवादित भूमि के बाहरी हिस्‍से पर कब्‍जा था। मुस्लिम पक्ष के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन फैसले में कई विरोधाभास है, लिहाजा हम फैसले से संतुष्ट नहीं है।

Posted By: Tilak Raj

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