जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली।अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद को मध्यस्थता के जरिए सुलझाने की एक बार फिर बात चली है। मुकदमे के दो पक्षकारों यूपी सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड और निर्वाणी अखाड़ा ने तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल को पत्र लिख कर फिर से मध्यस्थता प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया है। सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत न्यायाधीश एफएमआइ कलीफुल्ला की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय पैनल ने अयोध्या मामले की सुनवाई कर रही पांच सदस्यीय संविधान पीठ को पत्र की जानकारी देते हुए निर्देश मांगा है।

नयी पहल से उत्साहित नहीं
मध्यस्थता के जरिये मामला सुलझने की कोशिश नाकाम रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने लंबित अपीलों पर रोजाना नियमित सुनवाई शुरू की थी जो कि पिछले 24 दिन से लगातार चल रही है। अब दोबारा मध्यस्थता की चर्चा होने से लोगों के बीच केस को लेकर उहापोह की स्थिति बन गई है। हालांकि कोर्ट में मामले पर बहस कर रहे पक्षकारो के वकील की इस नयी पहल से जरा भी उत्साहित नजर नहीं आए। उनका कहना है कि किसी एक के पत्र लिखने से क्या होता है। इस मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड के अलावा कई अन्य मुस्लिम और हिन्दू पक्षों की अपीलें है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता नाकाम होने के बाद मामले में नियमित सुनवाई शुरू की है और आगे का फैसला भी सुप्रीम कोर्ट करेगा।

रोजाना चल रही है सुनवाई
वैसे सोमवार को किसी भी पक्ष की ओर से इस बारे में कोर्ट से चर्चा नहीं की गई। सुन्नी वक्फ बोर्ड इस मामले में एक अहम पक्षकार है और आजकल मुस्लिम पक्ष की ओर से ही बहस हो रही है। गत आठ मार्च को कोर्ट ने सेवानिवृत न्यायाधीश कलीफुल्ला वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू व आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर का तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल गठित किया था जिसे सभी पक्षों से बातचीत करके मामले का हल ढूंढने के प्रयास करने को कहा था। लेकिन कुछ पक्षकारों द्वारा मध्यस्थता मे हल न निकलने की शिकायत किये जाने के बाद कोर्ट ने पैनल से रिपोर्ट मंगा कर देखी थी जिसके बाद कोर्ट ने गत 3 अगस्त को मध्यस्थता कार्यवाही समाप्त कर 6 अगस्त से लंबित अपीलों पर रोजाना सुनवाई करने का निर्णय लिया था। तब से रोजाना सुनवाई चल रही है और सोमवार को सुनवाई का 24वां दिन था।

लाइव प्रसारण पर कोर्ट ने रजिस्ट्री से पूछा
अयोध्या मामले की सुनवाई के लाइव प्रसारण की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री से पूछा है कि सुनवाई के सजीव प्रसारण का सिस्टम कब से काम शुरू हो सकता है। कोर्ट ने यह निर्देश आरएसएस विचारक केएन गोविन्दाचार्य की याचिका पर सुनवाई के बाद दिये। इससे पहले उनके वकील विकास सिंह ने कहा कि गोविन्दाचार्य इस मामले को सुनना चाहते हैं लेकिन उनका पास नहीं बनता। कोर्ट का 2018 का आदेश है जिसमें महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई के लाइव प्रसारण की बात कही गई है। लेकिन मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश राजीव धवन ने मांग का विरोध किया। धवन ने कहा कि केस की काफी सुनवाई हो चुकी है ऐसे में बीच में मामले का सजीव प्रसारण ठीक नहीं रहेगा। कोर्ट ने कहा कि वह इस पहलू पर भी विचार करेंगे।

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Posted By: Tanisk

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