नई दिल्ली, प्रेट्र। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अयोध्या में राम मंदिर के लिए आधारशिला रखने से एक दिन पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने मंगलवार को कहा कि यह उनके और सभी भारतीयों के लिए एक ऐतिहासिक और भावनात्मक दिन है। उन्होंने बताया, ''इस मंदिर के लिए 1990 सोमनाथ से अयोध्या तक राम रथ यात्रा निकालने के दायित्व का निर्वहन किया था।''

सुशासन का प्रतीक होगा राम मंदिर

एक बयान में उन्होंने कहा कि यह उनकी धारणा है कि श्री राम मंदिर सभी के लिए न्याय के साथ एक मजबूत, समृद्ध, शांतिपूर्ण और सामंजस्यपूर्ण राष्ट्र के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व करेगा। यह सुशासन का प्रतीक होगा। यह ऐसे राम राज्य का प्रतीक बनेगा जहां किसी की उपेक्षा नहीं होगी। आडवाणी राम मंदिर आंदोलन के शिल्पकारों में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

1990 में राम रथयात्रा निकाल कर लोगों को किया जागरूक

राम जन्मभूमि की मुक्ति के लिए उन्होंने 1990 में राम रथ यात्रा निकाल कर लोगों को जागरूक किया था। उनके आह्वान पर बड़ी संख्या में लोगों ने अयोध्या पहुंचकर राम मंदिर निर्माण का संकल्प लिया था। उन्होंने अपने वीडियो संदेश में कहा कि राम जन्म भूमि आंदोलन में नियति ने मुझे 1990 में सोमनाथ से अयोध्या तक राम रथ यात्रा के रूप में एक महत्वपूर्ण कर्तव्य निभाने का अवसर दिया। इस यात्रा में अनगिनत लोगों ने भागीदारी की। इस यात्रा ने लोगों की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी उर्जा को एक साकार रूप दिया। उन्होंने कहा, ''भारत की सांस्कृतिक और सभ्यता की विरासत में श्री राम का बहुत आदरणीय स्थान है। वे सम्मान, अनुग्रह और मर्यादा के प्रतीक हैं। मेरा विश्वास है कि यह मंदिर सभी भारतीयों को उनके गुणों को आत्मसात करने के लिए प्रेरित करेगा।''

कोरोना महामारी के कारण अयोध्‍या के कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे आडवाणी

उल्लेखनीय है कि कोरोना महामारी के प्रकोप के कारण 92 वर्षीय आडवाणी अयोध्या में होने वाले कार्यक्रम में शामिल नहीं हो रहे हैं। राम रथ यात्रा के करीब तीन दशक बाद बनने जा रहे मंदिर के बारे में बुजुर्ग भाजपा नेता ने कहा कि कभी-कभी जीवन में कोई स्वप्न पूरा होने में बहुत समय लगता है। लेकिन जब यह फलीभूत होता है तब यह प्रतीत होता है कि प्रतीक्षा करना व्यर्थ नहीं रहा। उन्होंने कहा, ''राम मंदिर का स्वप्न मेरी हार्दिक इच्छा रही है। यह भाजपा के लिए एक अभियान रहा है। मुझे बहुत प्रसन्नता है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बहुत शांतिपूर्ण माहौल में मंदिर निर्माण प्रारंभ होने जा रहा है। यह मंदिर देश के लोगों को एकसूत्र में बांधने में सफल रहेगा। प्रभु राम भारत और भारतवासियों पर कृपा बनाए रखें। जय श्रीराम।''

आडवाणी ने रथयात्रा के जरिए जन-जन तक पहुंचाया

मुद्दा विहिप समेत संघ परिवार भले ही अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए साधु-संतों व अन्य लोगों को जोड़ने में जुटा रहा हो, लेकिन लाल कृष्ण आडवाणी ने अपनी रथयात्रा के सहारे इस मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया। 1990 में गुजरात के सोमनाथ से शुरू हुई उनकी रथयात्रा को बिहार में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने रोक दिया, तब तक यह आम लोगों का मुद्दा बन चुका था।

1992 में अयोध्‍या में विवादास्‍पद ढांचे के विध्वंस के समय लाल कृष्ण आडवाणी खुद मंच पर उपस्थित थे, इसी कारण सीबीआइ ने आपराधिक साजिश में उन्हें आरोपित बनाया। विवादास्‍पद ढांचे के विध्वंस की निंदा करते हुए भी आडवाणी ने कभी राम मंदिर निर्माण के संकल्प को पीछे नहीं छूटने दिया, बल्कि इसे बाकायदा भाजपा के चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा बना दिया और 1996 में भाजपा लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई। बाद में भाजपा को अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व में देश में शासन करने का मौका मिला। 

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