Assembly Elections 2026: तमिलनाडु से पुडुचेरी और बंगाल से असम तक... पांच राज्यों के चुनाव में दिखा बदलता भारत
भारत के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव 2026 ने नतीजों से पहले ही देश की बदलती राजनीति की तस्वीर ...और पढ़ें
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स्टार पावर से पहचान की राजनीति तक छाया रहा हर मुद्दा (AI द्वारा जनरेटेड फोटो)

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव 2026 अब नतीजों से पहले ही एक बड़ी कहानी लिख चुके हैं। केरल के नारियल बागानों से लेकर असम की चाय बागानों तक, इस चुनाव में तेज प्रचार, बदलते समीकरण और डिजिटल दौर की नई राजनीति साफ नजर आई।
नतीजे 4 मई को आएंगे, लेकिन चुनाव प्रचार ने यह दिखा दिया कि भारत की राजनीति अब बदलाव के दौर से गुजर रही है, जहां क्षेत्रीय पहचान, कल्याण योजनाएं और नए चेहरे अहम भूमिका निभा रहे हैं। इन चुनावों में कई घटनाएं ऐसी रहीं, जिन्होंने पूरे देश का ध्यान खींचा और चुनावी माहौल को अलग ही दिशा दी।
तमिलनाडु: विजय की एंट्री
तमिलनाडु में चुनाव से पहले ही बड़ा हादसा हो गया। 27 सितंबर 2025 को अभिनेता और नेता विजय की करूर रैली में भगदड़ मच गई, जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई।
इस घटना के बाद उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) पर मामला दर्ज हुआ और जांच सीबीआई को सौंपी गई। इसके बावजूद विजय की लोकप्रियता में कमी नहीं आई और उनके कार्यक्रमों में भीड़ जुटती रही, हालांकि उन्होंने बड़े आयोजनों से दूरी बना ली। उन्होंने पेरंबूर और तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया, जहां मुकाबला डीएमके से है।
असम: विवादित बयान और वीडियो
असम में चुनाव प्रचार के दौरान सबसे बड़ा विवाद एक वीडियो को लेकर हुआ। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का एक वीडियो सामने आया, जिसमें उन्हें मुस्लिम समुदाय के खिलाफ प्रतीकात्मक हिंसा करते दिखाया गया।
विपक्ष ने इसे नफरत फैलाने वाला बताया और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। सरमा ने अपने बयानों का बचाव करते हुए कहा कि वह अवैध घुसपैठियों की बात कर रहे थे। इसी बीच मशहूर गायक जुबीन गर्ग की मौत भी चुनावी मुद्दा बन गई, जिस पर विपक्ष ने न्याय दिलाने का वादा किया।
बंगाल: 90 लाख वोटर और रिकॉर्ड मतदान
पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले करीब 90 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का मुद्दा सबसे बड़ा रहा। इनमें से 27 लाख लोगों ने अपील की, लेकिन बहुत कम लोगों को राहत मिल सकी।
इसके बावजूद राज्य में रिकॉर्ड मतदान हुआ और पहले चरण में 92.8% वोटिंग दर्ज की गई। यह दिखाता है कि लोगों ने लोकतंत्र में अपनी भागीदारी को मजबूती से दिखाया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और गृह मंत्री अमित शाह के बीच बयानबाजी भी खूब चर्चा में रही।
मछली की राजनीति और पहचान
बंगाल में इस बार चुनाव प्रचार में 'मछली' भी बड़ा मुद्दा बन गई। भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों ने इसे अपनी-अपनी तरह से इस्तेमाल किया। भाजपा नेताओं ने लोगों के बीच मछली लेकर प्रचार किया, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि पार्टी स्थानीय संस्कृति को समझती है।
वहीं ममता बनर्जी ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह खानपान की आजादी पर हमला कर रही है। इसके जवाब में भाजपा नेताओं ने सार्वजनिक रूप से मछली खाकर अपना पक्ष रखा।
केरल: तीसरी ताकत की एंट्री
केरल में इस बार मुकाबला सिर्फ एलडीएफ और यूडीएफ के बीच नहीं रहा। भाजपा ने कई सीटों पर मजबूत चुनौती पेश की, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय हो गया।
मुख्यमंत्री पिनराई विजयन तीसरी बार सत्ता में लौटने की कोशिश कर रहे हैं, अगर ऐसा हुआ तो राज्य के इतिहास में यह पहली बार होगा। चुनाव के दौरान नकदी वितरण और फंड के दुरुपयोग जैसे आरोप भी लगे, जिन्हें सभी दलों ने खारिज किया।
पुडुचेरी: छोटी जगह, बड़ा ड्रामा
पुडुचेरी में भी राजनीति कम दिलचस्प नहीं रही। गठबंधन को लेकर खींचतान इतनी बढ़ गई कि एक केंद्रीय मंत्री को होटल में इंतजार करना पड़ा, लेकिन मुख्यमंत्री बैठक में नहीं पहुंचे।
यह विवाद एक नए दल और उसके नेता जोसे चार्ल्स मार्टिन को लेकर था, जो लॉटरी कारोबारी के बेटे हैं और अचानक राजनीति में उभरे। इन सबके बीच पुडुचेरी में 89.87% मतदान हुआ, जो 1964 के बाद सबसे ज्यादा है।
