असम में समान नागरिक संहिता की ओर बड़ा कदम, नियम तय करने के लिए 8 सदस्यीय समिति का गठन
असम सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए नियमों का मसौदा तैयार करने हेतु आठ सदस्यीय समिति का गठन किया है।

असम में UCC लागू करने की तैयारी तेज। (फोटो- सोशल मीडिया)
HighLights
यूसीसी नियम मसौदा तैयार करने को 8 सदस्यीय समिति गठित।
समिति एक महीने में सौंपेगी अपनी रिपोर्ट, अध्यक्ष देबा प्रसाद मिश्रा।
बहुविवाह पर प्रतिबंध, लिव-इन पंजीकरण अनिवार्य, एसटी पर लागू नहीं।
डिजिटल डेस्क, गुवाहाटी। असम सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए इसके नियमों का मसौदा तैयार करने के लिए आठ सदस्यीय समिति गठित की है।
राज्य के राजनीतिक विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, समिति को एक महीने के भीतर नियमों का मसौदा सौंपना होगा। गृह एवं राजनीतिक विभाग के सचिव देबा प्रसाद मिश्रा समिति के अध्यक्ष होंगे।
समिति में वित्त विभाग के विशेष आयुक्त एवं सचिव पार्थ प्रतिम मजूमदार, विधायी सचिव गीतांजलि डी सैकिया, अल्पसंख्यक कल्याण एवं विकास सचिव फरीदा शमसुल और गृह एवं राजनीतिक विभाग के अतिरिक्त सचिव मृदुल के दास सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं।
असम विधानसभा ने 27 मई को 'समान नागरिक संहिता, असम, 2026 विधेयक' पारित किया था। विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा गया है। इस कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों के लिए धर्म से इतर एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है।
विधेयक में बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने और लिव-इन संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रविधान है। बहुविवाह करने पर सात साल तक की सजा और लिव-इन संबंधों का पंजीकरण नहीं कराने पर तीन महीने की जेल का प्रस्ताव है। हालांकि, यह कानून असम में रहने वाले अनुसूचित जनजाति के लोगों पर लागू नहीं होगा।
सोर्स- न्यूज एजेंसी PTI के इनपुट के अनुसार
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