यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 10, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
फेसबुक की मदद से सेना ने बचाई गर्भवती की जान
भला हो सोशल मीडिया साइटों का जिनकी मदद से कश्मीर के बाढ़ग्रस्त इलाके में फंसी एक नौ महीने की गर्भवती ...और पढ़ें

नई दिल्ली। भला हो सोशल मीडिया साइटों का जिनकी मदद से कश्मीर के बाढ़ग्रस्त इलाके में फंसी एक नौ महीने की गर्भवती महिला की जान बचा ली गई। वाट्सएप और फेसबुक पर सूचना फैलने के बाद सेना ने मंगलवार को श्रीनगर के जवाहर नगर इलाके में तीसरी मंजिल पर फंसी महिला को सुरक्षित निकाल लिया।
महिला की बिल्डिंग के सामने 13 फुट तक पानी जमा था। महिला की बहन मरियम नीसा ने सेना की फेसबुक पेज पर अपील की थी कि उसकी गर्भवती बहन की जान बचा ली जाए। धीरे-धीरे यह सूचना अन्य सोशल मीडियों साइटों पर फैल गई।
गूगल भी कर रहा मदद:
बाढ़ में फंसे लोगों के परिजन उन्हें आसानी से ढूंढ सकें, इसके लिए गूगल भी सामने आया है। गूगल पर्सन फाइंडर एप्स का प्रयोग कर लोग अपने प्रियजनों के बारे में जानकारी पा सकते हैं।
इस एप्स का प्रयोग इससे पहले 2010 में हैती में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान किया गया था। एप्स का प्रयोग करने पर लोगों को एक लिंक मिलेगा जिस पर वह जिनको ढूंढना चाहते हैं, उनके बारे में संदेश डाल सकते हैं।
सेना-सरकार के हेल्पलाइन नंबर:
बाढ़ में फंसे लोगों के परिजनों को जानकारी मुहैया करवाने के लिए सेना और जम्मू-कश्मीर सरकार ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। सेना के नंबर हैं- 011-23019831 और 011-23322045।
इसके अलावा जम्मू-कश्मीर टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (जेकेटीडीसी) के जनरल मैनेजर सुशील अत्री के मोबाइल नंबर 94192-12447, जेएमसी के सचिव के मोबाइल नंबर 94191-46662 और डायरेक्टर अर्बन लोक बाडीज विनोद बहनल के मोबाइल नंबर 94191-27433 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
खोजी कुत्ते भी कम नहीं:
जल प्रलय के बीच जहां सेना देवदूत बन कर लोगों की मदद करने के साथ राहत और बचाव कार्य में जुटी है, वहीं उनके खोजी कुत्ते भी कम नहीं। विभिन्न खोज अभियानों में विशेष रूप से मलबे में दबे शवों को खोजने में खोजी कुत्ते विशेष भूमिका निभा रहे हैं।
रियासी जिले में तीन दिन पहले एक मकान के जमींदोज होने से उसमें चार लोग जिंदा दफन हो गए थे। इसमें से दो शव तो निकाल लिए गए लेकिन बाकी दो का कुछ पता नहीं चल पा रहा था। प्रशासन ने सेना की मदद मांगी। सेना के खोजी कुत्तों ने जमीन में दबे शवों को खोज निकाला।
