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आंध्र प्रदेश में पूरी तरह सूखी चित्रावती नदी, रेत पर ही करना पड़ा बप्पा का 'विसर्जन'

Published: Mon, 21 Sep 2026 10:38 AM (IST)

आंध्र प्रदेश के पुत्तलुरू में भीषण सूखे के कारण चित्रावती नदी पूरी तरह सूख गई है। हालात इतने गंभीर हैं ...और पढ़ें

पुत्तलुरू में भीषण सूखे से चित्रावती नदी पूरी तरह सूख गई। ( फोटो-सोशल मीडिया)

पुत्तलुरू में भीषण सूखे से चित्रावती नदी पूरी तरह सूख गई। ( फोटो-सोशल मीडिया)

HighLights

  1. पुत्तलुरू में भीषण सूखे से चित्रावती नदी पूरी तरह सूख गई।

  2. गणेश विसर्जन के लिए सूखी नदी की रेत पर बप्पा को विदा किया।

  3. मानसून की भारी कमी और अल नीनो सूखे के प्रमुख कारण।

डिजिटल डेस्क, अमरावती। आंध्र प्रदेश के पुत्तलुरू में भीषण सूखा पड़ रहा है। हालात ये हो गए हैं कि चित्रावती नदी पूरी तरह से सूख गई है, जहाँ पहले नदी बहती थी वहां आज सिर्फ रेत ही रेत देखने को मिल रही है। हालात ऐसे हैं कि लोगों के पास गणेश विसर्जन करने के लिए कोई नदी नहीं बची है।

सूखी नदी में किया बप्पा का विसर्जन

पुत्तलुरू में भीषण सूखे की हालत में एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने लोगों को दिल छू लिया। दरअसल जिस चित्रावती नदी में हर साल बप्पा का विसर्जन होता था, वहां इस पर पानी ही नहीं था। ऐसे में लोगों ने मजबूरी में बप्पा की मूर्तियों को सूखी नदी की रेत पर ही छोड़कर विदा कर दिया क्योंकि इसके अलावा उनके पास और कोई चारा नहीं था।

आंध्र प्रदेश में क्यों आई सूखे की स्थिति?

आंध्र प्रदेश में आये इस सूखे के पीछे कई स्थिति मानी जा रही है। मानसून की भारी कमी इस सूखे के पीछे मुख्य कारण माना जा रहा है। इस साल आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में मानसून के दौरान सामान्य से बहुत कम बारिश दर्ज की गई है।

वहीं अलनीनों भी इस सूखे के पीछे एक बड़ा कारण हो सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, 'वैश्विक जलवायु पैटर्न अल नीनो के प्रभाव के कारण मानसून कमजोर पड़ गया। अल नीनो के कारण भारत के दक्षिणी हिस्सों में वर्षा की अनिश्चितता बढ़ जाती है, जिससे इस क्षेत्र में सूखे जैसे हालात पैदा हुए।

लगातार कम बारिश होने की वजह से प्राकृतिक जल स्रोतों जैसे तालाबों और टैंकों का जलस्तर तो घटा ही, साथ ही भूजल का पुनर्भरण भी नहीं हो पाया। कृषि और घरेलू आवश्यकताओं के लिए बोरवेलों पर अत्यधिक निर्भरता के कारण लगभग 60% बोरवेल पूरी तरह सूख गए, जिससे पानी का संकट और गहरा गया।

स्थानीय स्तर पर जलाशयों के रखरखाव और जल प्रबंधन की कमियों के कारण भी सूखे का प्रभाव ज्यादा गंभीर हो गया। सही समय पर सिंचाई और पेयजल के लिए पानी का उचित भंडारण व वितरण न हो पाने से कृषि और आम जनजीवन दोनों ही बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

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